अशोक प्रियदर्शी
कहते हैं कि महाभारतकाल में पांडवों के आने से श्रापित राजा निग्र सर्पयोनि से मुक्त हो गए थे। ककोलत जल के सेवन से मदालसा नामक महिला के रोगी पति की कायाकल्प हो गया था। लेकिन बिहार का कश्मीर कहा जानेवाला ककोलत जलप्रपात का कायाकल्प नही हो सका। लेकिन 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यात्रा के बाद ककोलत के कायाकल्प की उम्मीदें बढ़ गई है। ककोलत का वनवास खत्म होने के आसार हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उर्जा मंत्री विजेन्द्र यादव ने ककोलत का हवाई सर्वेक्षण किया। फिर हैलीपेड पर उतरे उसके बाद सीढ़ियों से चढ़कर ककोलत का दीदार किए। ककोलत की मनोरम दृश्य देखने के बाद सीएम ने कहा कि यह उनकी बचपन की हसरत थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने ककोलत के विकास के लिए कई सौगात दी।
200 करोड़ रूपए की लागत से रोपवे
सीएम नीतीश कुमार ने अधिकारियों को करीब 200 करोड़ रूपए की लागत से जमीन से पहाड़ तक रोपवे बनाने का निर्देश दिया। इसके बाद टूरिस्ट कम्पलेक्स और पानी से संचालित पन बिजली संयत्र लगाने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। इसके बाद से लोगों की उम्मीदें जग गई है। उम्मीद की जा रही है कि 2019 में योजनाएं जमीन पर दिखने लगेगी। हालांकि घोषणाएं कई दफा की जाती रही है। लेकिन यह पहला अवसर है जब कोई मुख्यमंत्री खुद पहंुचे और ककोलत के विकास के लिए इतनी सारी योजनाएं की बात की है।
गोविन्दपुर पहाड़ी श्रृंखलाओं अवस्थित है ककोलत
बिहार की राजधानी पटना से करीब 145 किलोमीटर दक्षिण नवादा जिले के गोविन्दपुर पहाड़ी श्रृंखलाओं ककोलत जलप्रपात अवस्थित है। यह शीतल जलप्रपात है। जब देश का तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस होता है तब ककोलत जलप्रपात का तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस रहता है। लिहाजा, गरमी आते ही देसी विदेशी सैलानियों के आने जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। वैसे तो सालों भर लोग आते हैं। लेकिन विसुआ के अवसर पर 14 अप्रैल को पांच दिवसीय स्थानीय मेला लगता है। राज्य सरकार ने ककोलत को महोत्सव की सूची में शामिल किया है। हालांकि इसकी इसपर अमल नही किया जा सका है। ककोलत विकास परिषद के अध्यक्ष मसीह उददीन ने ककोलत के विकास के लिए सीएम को एक ज्ञापन भी दिया है। पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री और एमएलसी डॉ संजय पासवान के प्रयास से ककोलत जलप्रपात पर डाक टिकट जारी किया गया।
नियाग्रा ऑफ बिहार
ककोलत को बिहार का कश्मीर और ‘नियाग्रा ऑफ बिहार’ कहा जाता है। इसकी भौगोलिक संरचणा अमेरिका के नियाग्रा से मेल खाती है। ककोलत के आसपास की खुदाई में पाषाणकालीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं। इसे प्रागैतिहासिक काल में मानव जाति का निवास स्थल माना जाता है। कोल से मिलता जुलता नाम ककोलत को इसी से जोड़कर देखा जाता है। यह नवादा से 17 किलोमीटर दूर गोविंदपुर पहाड़ी श्रृखंला में अवस्थित है।



















































































































