100 साल पहले एक जगह शुरू हुई थी दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा, अब 31 पंडालों में हुई  पूजा

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दस पूजा पंडालों की कहानी-बिहार के अलावा बंगाल और झारखंड के कलाकारों ने दिया मूर्ति का स्वरूप, नवादा नगर में सबसे पहले 1919 में सब्जी मंडी में स्थापित हुई थी दुर्गा प्रतिमा, अब बड़ी दुर्गा के नाम से हैं प्रसिद्ध, रेलवे काॅलोनी में एक दिन पहले पट खुलने की रही है परंपरा, बंगाली प्रणाली से होती है पूजा

nawada durga pooja

शनिवार की शाम में सात बजे के बाद नगर में स्थापित सभी 31 पूजा पंडालों में पूजा अर्चना के लिए दुर्गा प्रतिमा का पट खुल गया। पट खुलने के साथ ही पूजा और दर्शन करनेवालों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग श्रद्धा और भक्ति के माहौल में पूजा पाठ करने लगे । पूरा माहौल भक्तिमय हो गया । रविवार को अष्टमी को महागौरी की पूजा हुई । कई जगहों पर टेंट से पूजा शुरू हुई। लेकिन धीरे धीरे बड़ा आकार और आकर्ष स्वरूप ले लिया है।

देखंे तो, जिला बनने के बाद प्रतिमा बनाने का सिलसिला भी बड़ा आकार लिया है। यही नहीं, बिहार के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल से कलाकार आते रहे हैं। शहर के हर पंडाल और मूर्तियों की कोई ना कोई खासियत है।

सब्जी मंडी दुर्गा प्रतिमा- पूजा के सौ साल

नगर के सब्जी मंडी में स्थापित दुर्गा प्रतिमा का इतिहास सबसे प्राचीन है। करीब 100 साल पहले सागरमल अग्रवाल ने नगर में दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू की थी। उनके निधन के बाद उनके परिजनों ने जारी रखा है। यहां अग्रवाल परिवार के आपसी सहयोग से पूजा-अर्चना होती है। यह सबसे पुरानी है। इसे लोग बड़ी दुर्गा भी कहते हैं।

रेलवे काॅलोनी- 69 साल पुराना अतीत

नगर के रेलवे काॅलोनी में स्थापित होनेवाले दुर्गा प्रतिमा का अतीत 69 साल पुरानी है। यहां बंगाली प्रणाली से पूजा होती है। यहां एक दिन पहले पट खुल जाता है। इसकी पूजा अर्चना के लिए बंगाल से पुजारी और मूर्तिकार आते रहे हैं। रेलवे में एक बंगाली अधिकारी आए थे। तब टेंट में शुरू हुई थी। उसके बाद मंडप बन गया। इसके बाद से परंपरागत रूप से पूजा होती रही है।

इंदिरा चौक- 64 साल का सफर

नगर के इंदिरा गांधी चैक पर चक्रवर्ती सम्राट दुर्गा पूजा समिति के जरिए पहली दफा 1955 में दुर्गा पूजा स्थापित हुई थी। उसके बाद से सिलसिला जारी है। यहां लंगर का आयोजन और रावण वध कार्यक्रम आयोजित होता है। इस जगह दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी पर हर साल सोने और चांदी की मुकुट सजाई जाती है। अलग-अलग थीम पर पंडाल बनाने के लिए प्रसिद्ध रहा है। इस बार पेरिस आॅफ लंदन का बैकिद्यम पैलेस आकर्षक पूजा पंडाल का स्वरूप है।

हाटपर दुर्गा पूजा- 41 साल का सफर

नगर के अस्पताल रोड हाट पर हनुमान मंडप हाटपर पूजा समिति 41 साल का सफर पूरा कर लिया है। 1978 में छोटे पैमाने पर टेंट पंडाल में पूजा शुरू हुई थी। फिर महावीर मंदिर का निर्माण हुआ, जिसमें प्रतिमा बिठाई गई। अब बड़े पंडाल में प्रतिमा स्थापित की जाती है। झारखंड के कलाकार मूर्ति का निर्माण किया है। इसके पंडाल और मूर्ति आकर्षक है।

अस्पताल रोड,अगिया बैताल-37 साल

अगिया बैताल दुर्गापूजा समिति के जरिए 1982 से अस्पताल रोड के देवी मंदिर के समीप प्रतिमा स्थापित की जाती है। यह समिति कम बजट में अलग किस्म का पंडाल बनाने के लिए प्रसिद्ध है। इस दफा पर्यावरण सुरक्षा पर केन्द्रित ईख से पंडाल का निर्माण कराया गया है। इसके पहले कुश, झोपड़ी जैसे थीम पर बनाई जा चुकी है। यह लोगों के लिए आकर्षक का केन्द्र बना है।

भगत सिंह चौक-45

भगत सिंह चौक पर नवादा को जिला बनने के एक साल बाद 1974 में प्रतिमा स्थापित की गई थी। इसका पंडाल बहुत आकर्षक है। इसकी शुरूआत जहानाबाद के सूर्यदेव प्रसाद सिंह और एक स्थानीय व्यक्ति के पहल पर शुरू की गई थी। इसका बजट करीब पांच लाख रुपए का है।

गढ़पर दुर्गापूजा- 38

आदर्श दुर्गा पूजा समिति गढ़पर की मूर्ति बेमिसाल रही है। पूजा समिति सदस्यों ने बताया कि मूर्ति पर ज्यादा खर्च करते हैं। लाइटिंग पर फोकस रखा गया है। पंडाल के खर्च को कम किया गया है। स्थानीय कलाकार यहां मूर्ति का निर्माण करते हैं। गढ़पर 1983 से दुर्गा प्रतिमा स्थापित की जा रही है। करीब चार लाख रुपए का बजट है।

न्यू एरिया- 24 साल

नवादा के न्यू एरिया मुहल्ला में पहली दफा 1996 में दुर्गा प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका पंडाल कोलकाता के आनंदमठ की थीम पर बनाया गया है। इसकी प्रतिमा काफी आकर्षक रही है। यहां एक देवी मंडप है, जहां स्थानीय लोगों के सहयोग प्रतिमा बनाने का सिलसिला शुरू हुआ है। अब यह व्यापक आकार ले लिया है।

रामनगर-22 साल

नवादा नगर के प्रखंड मुख्यालय के सामने रामनगर में दुर्गा पूजा का पंडाल आकर्षक है। यह पंडाल कोलकाता के एक प्रसिद्ध मंदिर की थीम पर है। झारखंड के पतरातू के कलाकार इस मूर्ति का निर्माण किया है। यह भी लाइटिंग आदि को लेकर खास रहा है। रामनगर दुर्गापूजा समिति 1998 में ब्लाॅक मुख्यालय के समीप प्रतिमा स्थापित करती आ रही है।

सद्भावना चौक-दो दशक

सद्भावना चौक पर बिजली आॅफिस का पूजा पंडाल काफी आकर्षण का केन्द्र है। इस पूजा पंडाल में इस दफा अंतरीक्ष से धरातल पर मां को उतरते दिखाया गया है। इसका अतीत पुराना रहा है। यह बिजली आॅफिस के नाम से जाना जाता है। लेकिन दो दशक से चर्चा का केन्द्र रहा है।

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