अशोक प्रियदर्शी
आरती हेमजा भारत मीडिल स्कूल में सातवीं में पढ़ती है। वह दो बहन है। उसके पिता शिवा राजवंशी कोलकाता में रहते हैं। उसकी मां सुनीता देवी ही उसे और उसकी बहन पार्वती का ख्याल रखती हैं। वह मजदूरी कर बेटियों को पढाना चाहती है। आरती कहती हंै वह जब पढ़ने जाती हैं तब लोग यह ताना मारते हैं कि पढ़ाई कर बेटा बन जाएगी। सहपाथियों के साथ बैठने पर भी एतराज करते हैं। पिछले दिनों जब जिला स्तरीय बिहार स्कूल स्पोर्टस मीट हुआ तब वह 100 मीटर रिले दौड़ में अव्वल आई है। उसके बाद उसे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन किया गया। वह 24-28 सितंबर तक पटना में आयोजित प्रतियोगिता में शामिल हो रही है।
आरती अकेली नही है। आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े नवादा जिले के सिरदला की ममता, चांदनी, सीमा, कंचन, अनिता, नीलम, नीलम-दो, की कहानी भी कुछ ऐसी हैं, जिन्हें बेटी होने के चलते मुश्किलें आती रही है। बसेरिया गांव के राजकुमार प्रसाद की बेटी कंचन तीन बहन और तीन भाई है। कंचन कहती हैं सामाज बेटियों के प्रति भेदभाव करते हैं। बेटियों को घर गृहस्थी तक सीमित रखना चाहते हैं। वह जब पढ़ना चाहती है तब लोग ताना मारते हैं। उसके मां पिता भी सामाजिक दबाव में आ गए थे। लेकिन भरोसा में लिया। लिहाजा, 3000 मीटर दौर में अव्वल आ सकीं।जब मौका मिला बेटियों ने दिखाया दम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बेटियों को जब अवसर मिला वह अपना दम दिखाती रही है। खास की एक साथ मीडिल स्कूल हेमजा भारत की आठ बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सभी को राज्यस्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित किया गया है।
जिला में ममता 200 मीटर, सीमा डिस्कश थ्रो, नीलम 100 मीटर रिले दौड़, एक और नीलम जेबलीन थ्रो, चांदनी 100 मीटर रिले दौड़ और अनिता उंची कूद में अव्वल आई है। फिजिकल टीचर के बगैर उपलब्धि लड़कियों ने बताया कि स्कूल में फिजिकल टीचर नही हैं। लेकिन टीचर राजेश भारती उनसबों को सिखाते रहे हैं। टीचर राजेश कुमार भारती कहते हैं कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के चलते सिरदला का समुचित विकास नही हुआ। ऐसे में बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता कम है। लेकिन बेटियों में शिक्षा के प्रति ललक है। यही कारण है कि जब भी उसे मौका मिलता है दमदार उपस्थिति दर्ज कराती है।



















































































































