सर्वेश गौतम
नवादा के हिसुआ के ब्रहमपिशाच गली निवासी अशोक कुमार की बचपन फटेहाली व आर्थिक तंगी में बीती। गरीबी के कारण 16 साल की उम्र में उन्होंने अखबार बेचना शुरू कर दिया। लेकिन आज वह हिसुआ में अखबार के हाॅकर के रूप में सबसे फेमस चेहरा हैं ही,तरक्की के मामले में भी गरीबी को पीछे छोड़ते हुए,कई को पीछे छोड़ चुके हैं। अब अशोक के पास न केवल अखबार बेचने की जिम्मेवारी है बल्कि पेप्सी सहित कई कम्पनियांें की एजेंसी भी है। इतने कारोबार के बाद भी वे सभी कार्यों को बखूबी निभा रहे हैं। वे कहते हैं कि लक्ष्य तय हो और मेहनत में कमी न हो तो काम कितना भी ज्यादा क्यों न हो आसानी से सारा काम निकल जाता है।
– सुबह के चार घंटे अशोक के इर्द-गिर्द ही घुमता है विश्व शांति चैक पर आए लोगों की रूटीन
जाड़ा,गर्मी या हो बरसात अशोक सुबह साढ़े तीन बजे हिसुआ के विश्व शांति चैक आ जाते है। इसी समय से इनके कारोबार की शुरूआत हो जाती है। लेकिन हिसुआ के दर्जनों ऐसे लोग हैं जिनके सुबह की शुरूआत इन्हें के इर्द-गिर्द होती है। हिसुआ के सदानंद प्रसाद,पवन गुप्ता आदि बताते हैं कि हिसुआ में रहने पर जबतक विश्वशांति चैक पर सभी अखबार नहीं देख लेते हैं संतोष नहीं होता है। ऐसे कई लोग हैं जो सुबह होते ही अशोक हाॅकर के पास जाकर अखबार लेते हैं और वहीं पढ़ते हैं फिर कुछ राजनीति और गैर राजनीतिक चर्चाएं कर वापस आते हैं। अशोक भी कभी किसी से झल्लाकर या उबाउ होकर बात नहीं करते हैं। यही वजह होती है कि लोगों की भीड़ सुबह 4 बजे से आठ बजे तक इनके पास लगी रहती है।
– 34 साल पहले बिहार शरीफ से शुरू किया अखबार बेचना,17 पैसे में बेची अखबार
अशोक कहते हैं पिता दशरथ प्रसाद हिसुआ चौक पर पानी की गुमटी किए हुए थे। इससे इतनी आमदनी नहीं थी कि हमलोग दो भाई बहन पढ़ाई कर पाते। लिहाजा छठी तक पढ़ाई ही छोड़ दी और पिता के काम में हाथ बटाने लगा। फिर नवादा के उदयभान सिंह ने बिहारशरीफ में एक अखबार की एजेंसी ली। इससे पहले हिसुआ के दिलीप ने इससे जोड़ लिया और बिहारशरीफ से अखबार लेकर नालन्दा के परवलपुर में अखबार बेचना शुरू किया। वे कहते हैं शुरूआती दौर में 17 पैसे में अखबार पाठकों को मिल जाता था। लेकिन उस वक्त 25-30 से ज्यादा लोग अखबार नहीं लेते थे क्योंकि उस दौर में शौकीन लोग ही अखबार लेते थे।
– 18 लोगों को दे रहे रोजगार, चार हजार प्रतियां प्रतिदिन बेची जा रही
अशोक कहते हैं बिहारशरीफ के बाद 1985 में हिसुआ में अखबार बेचना शुरू किया तो नवादा जाकर अखबार लाना पड़ता था। वहां से साईकिल से लेकर नारदीगंज,बस्तीविगहा,होते हिसुआ में अखबार बेचते फिर शेखपुरा,नरहट आदी जगहों पर अखबार पहुंचाते थे। सुबह से शाम तक इसी में लगे रहते थे। पहले कोई घटना होती थी तो अेलीफोन एक्सचेंज जाकर काॅपी बढ़ाने के अनुरोध करना पड़ता था। लेकिन अब तो इतनी सुविधा हो गई कि दरबाजे तक अखबार भेजा जा रहा है और मनमानी काॅपियां आ रही है। वे कहते हैं कि हिसुआ में 18 लोगों को अखबार पहुंचाने के लिए जोड़ा है और प्रतिदिन चार हजार प्रतियां बेची जा रही है।





















































































































