नवादा टुडे डेस्क
वारिसलीगंज आशा कार्यकर्ताओं की एक माह से चल रही हड़ताल के कारण वारिसलीगंज पीएचसी में प्रतिमाह होने वाले संस्थागत प्रसव में काफी कमी आ गई। प्रतिमाह 250 की लक्ष्य के विरुद्ध 26 दिसम्बर तक प्रखंड क्षेत्र के मात्र 170 महिलाएं ने प्रसव कराने के लिए पीएससी पहुंची।
पीएचसी के बीसीएम सह प्रभारी स्वास्थ्य प्रबन्धक रेणुका कुमारी ने बताई की आशा की एक माह से चल रही हड़ताल के कारण प्रसव से ज्यादा प्रभावित परिवार कल्याण ऑपरेशन हुआ है। प्रतिरक्षण कार्य खासकर मिशन इंद्र धनुष को हड़ताल ने बुरी तरह प्रभावित किया है। यूनिसेफ के बीएमसी राजीव कुमार ने बताया कि नवंबर माह में इंद्रधनुष का लक्ष्य प्राप्त करने में आंगनबाड़ी सेविकाओ की सहयोग के बाद भी काफी मशक्कत करना पड़ा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में हर टोले कस्बे तक सरकार की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की जानकारी फैलाने से लेकर महिलाओं को अस्पताल लेकर इलाज तथा प्रसव आदि कार्य में अहम रोल अदा करने वाली प्रखंड की 180 आशा कार्यकर्ता तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रामकुमार के द्वारा अपमानित करने के वजह से पिछले एक माह से हड़ताल पर है। आशा के कार्य बहिष्कार और हड़ताल से अस्पताल के माध्यम से चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
अस्पताल प्रभारी समेत जिला प्रशासन आशा की समस्याओं का समाधान कर हड़ताल समाप्त करने के बजाय दो आशा फैसिलेटर के अष्टम वर्ग के स्थानांतरण प्रमाण पत्रों की जांच आनन फानन में करवाकर चयन मुक्त और ऊपर से तीन आशा कार्यकर्ता के विरुद्ध स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज करवा दिया गया है।
अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई से आशा कार्यकर्ता में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। हालंाकि जिलाधिकारी के निर्देश पर अस्पताल के तत्कालीन प्रभारी डॉ रामकुमार को स्थानांतरित कर काशीचक पीएचसी के प्रभारी चिकित्सक को प्रभार दिलवाया गया है। लेकिन आशा के विरुद्ध की गई कार्रवाई का समाधान नहीं होने के कारण प्रखंड क्षेत्र के आशा कर्मी सीएचसी के सभी कार्यों का लगातार एक माह से अधिक समय से कार्य बहिष्कार पर डटी हुई है।
वहीं जिला प्रशासन द्वारा इस मामले में किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिए जाने से वारिसलीगंज के लोगों में रोष है।





















































































































