अशोक प्रियदर्शी
बेइमान की उम्र छोटी होती है। ईमानदार मौत के बाद भी जिंदा रहता है। बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज के कुटरी के आलोक चंद्रा की कहानी ऐसी ही है। आलोक चंद्रा जब बेइमानों की नही चलने दी तब उन्हें गोली मारकर खत्म करने की कोशिश की। लेकिन वह मरकर भी अमर हो गए। बैंक आॅफ बड़ौदा ने आलोक चंद्रा के नाम पर -बड़ोदरा आलोक चंद्रा बेरेवरी एवार्ड- शुरू किया है। बैंक के एचआरएम एंड क्लो अर्चना पांडेय ने देश और विदेश की सभी शाखाओं में सर्कुलर जारी कर इस निर्णय से अवगत कराया है।
अर्चना पांडेय के मुताबिक, प्रत्येक साल एक ईमानदार कर्मी को यह एवार्ड दिए जाएंगे। इसके तहत गोल्ड मेडल, प्रशस्ती पत्र के अलावा एक लाख रूपए नगद दिए जाएंगे। 2017-18 में 26 जनवरी को एक ऐसे इमानदार कर्मी के नाम की घोषणा की जाएगी। 21 दिसंबर तक नाॅमिनेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली जानी है। हर स्तर के बैंक अधिकारियों से नामों की स्कू्रटनी के बाद चयन कमिटी आखिरी निर्णय लेगी। इसके अगले वितीय वर्ष में 15 अगस्त को ऐसे कर्मी के नाम की घोषणा की जाएगी।
अर्चना पांडेय के मुताबिक, बैंक ने यह निर्णय इमानदारीपूर्वक काम करनेवालों के मनोबल को आगे बढ़ाने के उदेश्य से किया है। स्पेशल केस में एक साल में एक से अधिक लोगों को भी यह एवार्ड दिए जा सकेंगे। बैंक के इस निर्णय से आलोक के परिवार काफी खुश है। पिता चंद्रभूषण शर्मा, भाई आलोक, पत्नी निधि चंद्रा और परिजन महेश प्रसाद सिंह ने बैंक के प्रति आभार जताया है। दरसअल, बैंक ने आलोक चंद्रा की मौत के मामले में काफी संजीदगी दिखाई है। हत्या के 45 दिनों के अंतराल में दिवंगत आलोक की पत्नी निधि चंद्रा को जाॅब दिया है।
ईमानदारी के मिसाल के लिए ग्रामीण बना रहे आलोक चंद्रा द्वार

आलोक चंद्रा के जन्मदिन 24 नवंबर को ग्रामीणों ने वारिसलीगंज-कुटरी संपर्क पथ पर एक द्वार की नींव रखी। आलोक चंद्रा की कुर्बानी को यादगार बनाने के लिए आपसी सहयोग से नींव रखी है।
हेराफेरी में साथ नही दिया तब डेढ़ लाख रूपए देकर कराई थी हत्या
आलोक चंद्रा 19 मई को अपने गांव चाचा के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए आए थे। 21 मई की सुबह बैंक जा रहे थे तब परसा थाना के नेहालपुर डार्यवर्सन के समीप अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने 55 दिनों के अंतराल में हत्या की गुत्थी सुलझा ली थी। बैंक के सहायक मैनेजर राजेश कुमार और अरवल स्थित बाइक एजेंजी के मालिक ब्रजेश कुमार समेत छह लोगों को गिरफतार कर लिया था। आरोपियों ने स्वीकार किया था कि ब्रजेश कुमार ने बिजनेस के नाम पर डेढ़ करोड़ रूपए लिया था। लेकिन उसे हड़पना चाहते थे। आलोक को आॅफर मिले। लेकिन वह राजी नही हुए तब सुपारी किलर को डेढ़ लाख रूपए देकर हत्या करवाई थी। हालांकि ब्रजेश का साला जितेन्द्र फरार चल रहा है।





















































































































