जिनके अभिभावक ताइक्वांडो खेलने से करते थे मना, उनकी बेटियों ने स्टेट- नेशनल में जगह बनाकर जीता दिल

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 अशोक प्रियदर्शी

लखीसराय में आयोजित राज्यस्तरीय विधालय खेल प्रतियोगिता 2018 में नवादा नगर के वीआइपी काॅलोनी की रीतिका ब्राउंच और स्नेहा गोल्ड मेडल हासिल की। दोनों बहनों की कामयाबी पर उनके परिजन भी काफी खुश हैं। लेकिन परिजनों को यह खुशी रीतिका और स्नेहा का दृढ़ निश्चय और विश्वास बना है। रीतिका बताती हैं कि उनके पापा कहा करते थे कि ताइक्वांडो खतरनाक खेल है। इसमें हाथ पैड़ टूट सकता है, जिससे लड़कियों की शादी में भी परेशानी आ जाएगी। पर मम्मी ने साथ दी। और जब गेम में बेहतर प्रदर्शन करने लगी तब पापा भी साथ देने लगे।   

रीतिका और स्नेहा की कहानी अकेला नही है। नगर मिरजापुर की नेहा यदुवंशी बताती हैं कि उनके चाचा को नाराजगी थी। लेकिन मम्मी और पापा ने अवसर दिया, जिसके कारण आगे खेल पाई। यही नहीं, नवीन नगर की हनी कश्यप कहती हैं कि उसके दुबलापन के कारण उनके पापा तैयार नही थे। उन्हें घर से निकलने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। लेकिन वह जिद कर खेली। तब ब्राउंच लाई हूं। इसके पहले एसोसिएशन से खेली थी। तब भी ब्राउंच लाई थी।

जुनून का नतीजा की पांच पदक लड़कियां जीती

लखीसराय में 8-11 अक्टूबर को आयोजित राज्यस्तरीय विधालय खेल प्रतियोगिता में नवादा से 35 ताइक्वांडो खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इनमें तीन स्वर्ण, तीन रजत और 8 कांस्य पदक लिया है। इसमें पांच पदक लड़कियां जीती। शिवनगर की रूपम पांडेय, वीआईपी काॅलोनी की स्नेहा स्वर्ण, जबकि रीतिका, नवीनगर की हनी कश्यप और राजेन्द्र नगर की खुशी कांस्य पदक हासिल की।

ताइक्वांडो में लड़के के अभिभावक भी करते हैं मना   

गोंदापुर का रविरंजन कहते हैं कि उनके पिता को भी ताइक्वांडो खेल पसंद नही था। लेकिन जब उन्हें कामयाबी मिलने लगा तब पिता भी खुश रहने लगे। रविरंजन के पिता मोसाफिर चैधरी सब्जी बेचते हैं। उनकी इच्छा थी कि बेटे पढ़ाई कर कामयाबी हासिल करे। लेकिन 2013 में स्कूल गेम नेशनल में मध्यप्रदेश में कांस्य पदक मिला तब वह भी खुश रहने लगे। उसके बाद 2016 में नेशनल आंध्रप्रदेश में गोल्ड लिया। यही नहीं, 2018 के एसोसिएशन में गोल्ड और स्कूल में ब्राउंच लाया है।

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