अशोक प्रियदर्शी
बात एक दशक पहले की है। बिहार के नवादा के नेहालुचक की दीपशिखा नगर के कन्या मीडिल स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। सरकार की ओर से स्कूल में लड़कियों को एक माह का ट्रायक्वाडों की ट्रेनिंग दी गई थी। दीपशिखा का प्रदर्शन बेहतर था। लिहाजा, कोच ने बाहर भी सिखने का आॅफर दिया। दीपशिखा तैयार हो गई। वह परिवार से सहमति लेकर अभ्यास करना शुरू कर दी। मुश्किल कि जब दीपशिखा गोवर्द्धन मंदिर परिसर में जाने लगी तब वह लड़की में अकेली थी। सिर्फ लड़के ही अभ्यास करते थे।
लिहाजा, उसे लड़कों के बीच अभ्यास करने की चुनौती थी। लेकिन वह अभ्यास करती रही। दीपशिखा बताती है कि समाज के लोग ताना मारते थे। रास्ते मंे लोग भददी टिप्पणियां भी करते थे। लेकिन वह इसकी परवाह नही की। जरूरत पड़ी तो पलटकर जबाव भी दिया। दीपशिखा कहती हैं कि सबसे बड़ी बात कि उनके माता पिता उन्हें काफी सहयोग किया। जब वह सफल होने लगी तब बाकी लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। तारीफ करने लगे।
दीपशिखा की प्रेरणा से जुड़ी कई लड़कियां
कोच सोनू कुमार बताते हैं कि दीपशिखा जब से जुड़ी लगातार 2008 से जिला में गोल्ड मेडल लेती रही है। यही नहीं, 2012 से लगातार राज्य में गोल्ड मेडल लेती रही हैं। सोनू बताते हैं कि सबसे बड़ी बात यह हुई कि बाकी लड़कियां भी जुड़ने लगी। आज 25-30 लड़कियां अभ्यास के लिए आती हैं। सोनू कहते हैं कि वह पिछले बारह सालों से ट्रायक्वाडों की ट्रेनिंग दे रहे हैं लेकिन दीपशिखा की सफलता की सबसे बड़ी वजह यह है कि वह मेहनती, अनुशासित और काम के प्रति समर्पित है।
बिहार सरकार ने 75000 रूपए देकर किया सम्मानित 29 अगस्त को खेल दिवस के अवसर पर डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने दीपशिखा को खेल सम्मान से सम्मानित किया। दीपशिखा को 75 हजार रूपए भी दिया गया है। दरअसल, दीपशिखा नवंबर 2017 मंे जम्मू कश्मीर में आयोजित 36वीं सीनियर नेशनल ट्राइक्वाडों चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल लेकर राज्य को गौरवांवित की। इसके पहले 2015 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आयोजित राष्ट्रीय जुनियर ट्रायक्वांडों चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था।
फिलहाल, 37वीं नेशनल चैम्पियनशिप के लिए चयन किया गया है। दीपशिखा की पृष्ठभूमि दीपशिखा नवादा जिले के सदर प्रखंड के नेहालुचक गांव निवासी अवधेश कुमार की बेटी हैं। पिता किसान और मां सुमित्रा देवी गृहिणी हैं। दीपशिखा दो बहनों में छोटी है। दीपशिखा के दोनों भाई विवेक और मिथुन ट्रायक्वांडो का अभ्यास किया था। लेकिन बेहतर प्रदर्शन नही रहने के कारण पढाई का रास्ता चुना। दीपशिखा इतिहास विषय से आॅनर्स की है।






















































































































