सत्या ने किचेन में गढ़ी कविता, कलमकार मंच करेगा सम्मानित

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कृष्ण मुरारी शास्त्री
आप किचेन में मसालेदार और स्वादिष्ट व्यंजन बनते सुने और देखे होंगे। लेकिन सत्या शर्मा कृति एक ऐसा नाम है जिन्होंने अपने किचन में साहित्य का सृजन की है। खास बात कि गृहिणी रही सत्या शर्मा की कविता को राष्ट्रीय कलमकार मंच सम्मानित कर रहा है।


नवादा नगर के पार नवादा स्थित देवी मंदिर इलाका की रहनेवाली सत्या शर्मा कृति चार भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर है। सत्या शर्मा की प्रारंभिक पढ़ाई लिखाई नवादा में हुई। फिर वह रांची में रहकर अध्ययन और लेखन को आगे बढ़ाई। सत्या ताइक्वांडो में प्रदेश स्तर तक सम्मान हासिल कर चुकी है। वह एमए एवं एलएलबी की पढाई के बाद घर गृहस्थी में जुट गई। इसके बावजूद साहित्य सृजन को नहीं भूली। यही वजह है कि उनके किचेन से निकले शब्द को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है।


राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ कविता के लिए होगी सम्मानित
प्रमुख साहित्य संस्था कलमकार मंच की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिवर्ष आयोजित की जानेवाली कलमकार के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित हुई है। सत्या शर्मा कृति बताती हैं कि काफी मेहनत के बाद साहित्य के क्षेत्र में अपनी मुकाम हासिल कर पाई हूं। सत्या कहती है यह मेरे लिए गौरव की बात है कि काफी कवियों के बीच मेरी कविता को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया। यह मेरे लिए इससे बड़ा खुशी का पल क्या हो सकता है।

पति के सहयोग को सराहा
सत्या शर्मा कहती हैं महिलाओं की शादी के बाद घर- गृहस्थी जीवन का हिस्सा हो जाता है। लेकिन मेरे इंजीनियर पति राजेश शर्मा मेरी लेखनी का सम्मान किए। सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे। यही कारण है कि वह कविता मंे दिलचस्पी दिखाती रहीं। इसका श्रेय पति को जाता हैं।

कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी है लेख
सत्या शर्मा ने बताया कि भारत के राष्ट्रीय पत्रिका कादिम्बनी, हंस समेत कई पत्र पत्रिकाओं में मेरी लिखित लघु कथा एवं कविता को स्थान दिया गया है। हिन्दी प्रचारिणी सभा, कनाडा की अंतर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका हिन्दी चेतना में भी लेखनी को स्थान मिल चुका है।

साहित्य के क्षेत्र में मिले है कई सम्मान
लघुकथा लहरी सम्मान-2018, साहित्य मंजरी सम्मान-2017, युग सुरूचि सम्मान, साहित्य विदुषी सम्मान, पटना-2018, केजी पब्लिकेशन के द्वारा साहित्य सारथी सम्मान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, रांची समेत कई सम्मान पा चुकी है। अब सत्या को झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित की हैं।

लिम्का बुक आॅफ रिकार्डस में नाम है दर्ज
सत्या को लिम्का बुक आॅफ रिकाॅर्डस में भी नाम दर्ज है। सत्या ने थरमोकोल से भगवान गणेश की बहुत छोटी सी आकर्षक प्रतिमा बनाई थी। उन्हें लघुकथा लहरी सम्मान-2018, साहित्य मंजरी सम्मान-2017, युग सुरूचि सम्मान, साहित्य विदुषी सम्मान, पटना-2018, केजी पब्लिकेशन के द्वारा साहित्य सारथी सम्मान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, रांची समेत कई सम्मान पा चुकी है। अब सत्या को झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित की हैं।

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