आलोक चंद्रा के नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा शुरू किया गया वीरता का पहला पुरस्कार राजस्थान के वेद प्रकाश को

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सुजीत कुमार
ईमानदारी के कारण जान गंवाने वाले जिले के वारिसलीगंज प्रखंड अंतर्गत कुटरी निवासी स्वर्गीय आलोक चंद्रा के नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा के द्वारा आलोक चंद्र वीरता पुरस्कार का शुरू किया गया है। आलोक चन्द्रा वीरता पुरस्कार की शुरूआत 26 जनवरी को किया गया। प्रथम वीरता पुरस्कार वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए राजस्थान निवासी वेद प्रकाश चावला को दिया गया है। इन्हें एक लाख रूपए नगद व प्रशस्ति पत्र दिया गया है। 70 वंे गणतंत्र दिवस के मौके पर आलोक चंद्रा बहादुरी पुरस्कार प्रदान करने के लिए मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स में बैंक ऑफ बड़ौदा के द्वारा एक समारोह आयोजित कर भगत भगत सिंह कॉलोनी भिवाड़ी शाखा राजस्थान स्पेशल असिस्टेंट पद पर कार्यरत वेद प्रकाश चावला को सम्मानित किया गया है। इन्होंने बहादुरी का परिचय देकर बैंक ऑफ बड़ौदा भिवाड़ी शाखा में बैंक लूटने के मकसद से आए हथियारबंद नकाबपोश से बैंक प्रबंधक की जान बचाते हुए बैंक लूटने से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

आलोक चंद्रा को बैंक ऑफ बड़ौदा हर समय याद करेगा


अपने बेटे के नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा शुरू किए गए सम्मान समारोह के प्रथम समारोह में आलोक चंद्रा के पिता चंद्र भूषण शर्मा ,भाई अतुल कुमार ,चाचा मुकेश सिंह ,विपिन सिंह व पत्नी निधि चंद्रा ,पुत्र आरव चंद्रा को भी अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया। गणतंत्र दिवस के झंडोत्तोलन के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी एंड सीईओ जया कुमार ने कहा कोई याद करें या ना करें ईमानदारी के चलते अपनी जान गंवाने वाले आलोक चंद्रा की शहादत को बैंक ऑफ बड़ौदा के देश भर में फैले 55 हजार कर्मी पूरी जिंदगी याद रखेंगे।

बैंक में हो रहे गलत कार्यो के विरोध के कारण गोलियों से भूनकर कर दी थी हत्या

Alok chandra


वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के कुटरी निवासी चंद्र भूषण शर्मा के बड़े पुत्र और बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक रहे आलोक चंद्रा बैंक में व्याप्त भ्रष्टाचार व दलालों पर नकेल कसना शुरू कर दिया था। उसी से गुस्साए बैंक कर्मियों की मिलीभगत से घर से बैंक जाने के दौरान 21 मई को आलोक चंद्रा की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। ईमानदारी के चलते जान गंवाने वाले युवा शाखा प्रबंधक आलोक चंद्रा की मौत के बाद परिजन व वारिसलीगंज के लोग सरकार से आलोक चंद्रा को शहीद का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं।

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