नवादा की बेटी अर्चना ने आईईएस में 16वां रैंक लाकर लहराया परमचम
ओंकार कश्यप
नवादा की बेटी अर्चना ने आईईएस में 16वां रैंक लाकर लहराया परमचम पिछले कुछ महीनों से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय लगातर चर्चा में है और लोग इसके पक्ष तथा विरोध में बहस कर रहें है। इसी बीच बिहार वासियों के लिए (जेएनयू से जुड़ी एक बड़ी खबर आई है जिसे पढकर बिहार वासियों का सीना चैड़ा हो गया। जेएनयू में पढ रही बिहार के नवादा की बेटी अर्चना ने भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) की परीक्षा में 16वां रैंक हासिल कर बिहार वासियों को गौरान्वित किया है। अर्चना नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के पड़रिया गांव की रहने वाली है। मिडिल स्कूल के रिटार्यड प्रधानाध्यापक राजदेव प्रसाद की पुत्री अर्चना जेएनयू की छात्रा है और पहली बार भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) की परीक्षा दी थी। 32 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में अर्चना ने पहली बार में ही बाजी मार ली। उसने इस परीक्षा में न सिर्फ सफलता हासिल की बल्कि शानदार प्रदर्शन करते हुए 16वां रैंक भी हासिल किया।
सरस्वती विद्या मंदिर में हुई शुरूआती पढाई
अर्चना की पढाई के प्रति लगन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने आरएसएस की पृष्ठभूमि से लेकर वामपंथ के गढ तक में पढाई की लेकिन इसके बावजूद किसी विचारधारा की अतिवाद में नहीं पड़ी और आईईएस जैसे देश के प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। उन्होंनें ग्रेजुएशन दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम काॅलेज से तथा पीजी की पढाई जेएनयू से की है। अर्चना फिलहाल जेएनयू से ही एमफिल कर रही है।
पढाई के प्रति दृढ निश्चय ने दिलाई सफलता
अर्चना बताती है कि बिहार के राजगीर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में अच्छा शैक्षणिक वातावरण मिला और बेस मजबूत हुआ। बाद में दिल्ली के लेडी श्रीराम काॅलेज में दाखिला मिला तो अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अच्छा करने का अवसर मिल गया। इसके बाद जेएनयू का अकादमिक माहौल हमारे लिए बेहद मददगार रहा है। अब देश सेवा में अपना योगदान कर देश की बेरोजगारी दूर करने की कोशिश करूंगी।
अच्छे शैक्षणिक संस्थानों को बचाने की जरूरत
अर्चना कहती है कि हाल के कुछ दिनों में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के बारे में जो धारना बनी है सब कुछ वैसा नहीं है। जेएनयू में पढाई का बेहतर माहौल है। जहां तक आंदोलन की बात है तो फीस बढोतरी आदि जायज मुद्दे को लेकर हो रहा आंदोलन जायज है। फीस बढेगी तो गरीब छात्रों का यहां आना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन बाकि के बेमतलब के आंदोलन खासकर हिंसक आंदोलन वगैरह से यहां के आम छात्र अलग रहते हैं। इस तरह के मुद्दे हमें सरकार और पुलिस पर भी छोड़ना चाहिए।























































































































