गोणावां जैन मंदिर में तीर्थंकर चंद्र प्रभु एवं वासुपूज्य की प्रतिमा स्थापित जैन धर्मावलंबियों ने श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया पूजन एवं आरती मंगल

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नवादा टुडे डेस्क  

अहिंसा एवं शांति के अवतार जैन धर्म के चैबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के प्रथम शिष्य श्री गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण भूमि श्री गोणावां जी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र पर आठवें तीर्थंकर चंद्र प्रभु एवं बारहवें तीर्थंकर वासुपूज्य की नवप्रतिष्ठित प्रतिमाओं को पूरी श्रद्धा व भक्तिभाव के साथ स्थापित किया गया।

इन अवसर पर रविवार को स्थानीय जैन धर्मावलंबियों ने क्षेत्र पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरे विधि-विधान के साथ नवप्रतिष्ठित जैन प्रतिमाओं का अभिषेक एवं पूजा-अर्चना की। संध्या समय श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक णमोकार महामंत्र का मंगलपाठ एवं मंगलआरती कर न केवल अपने आराध्य की आराधना की, बल्कि ब्रह्मांड के सभी प्राणियों के कल्याण के साथ ही विश्वशांति की मंगलकामना की।

इस धार्मिक अनुष्ठान में स्थानीय जैन समाज के दीपक जैन, राजेश जैन, अशोक कुमार जैन, मुकेश जैन, सत्येंद्र जैन, क्षेत्र प्रबंधक विमल जैन, उप प्रबंधक सोनू जैन, शुभम जैन, आलोक जैन व अभिषेक जैन के साथ ही लक्ष्मी जैन, सुनीता जैन, अनिता जैन, शीला जैन, श्रुति जैन, श्रेया जैन, खुशबू जैन, संतोष जैन, रजनी जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।

जैन समाज के प्रतिनिधि दीपक जैन ने बताया कि जैन धर्म के चैबीस तीर्थंकरों में से बीस तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि श्री सम्मेद शिखर (गिरिडीह, झारखंड) में जैनाचार्य 108 श्री विराग सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में विगत 10 जनवरी से 15 जनवरी तक भव्य पंच कल्याणक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था।

इस अनुष्ठान के दौरान तीर्थंकर चंद्र प्रभु व वासुपूज्य के साथ ही प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव व तेइसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ सहित कुल चार प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित कराने के बाद श्री गोणावां जी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र पर लाया गया। दीपक जैन ने बताया कि इन चार प्रतिमाओं में से चंद्र प्रभु व वासुपूज्य की प्रतिमा को गोणावां सिद्ध क्षेत्र की मूल वेदी में स्थापित किया गया है, जबकि शेष ऋषभदेव व पार्श्वनाथ की प्रतिमा को शीघ्र ही नौबतपुर (पटना) स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में स्थापित कराया जाएगा।

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