नवादा टुडे डेस्क
नवादा शिशुओं को स्वस्थ रखने के लिए कुछ साल पहले जिले में व्यवस्था शुरू की गई तो शिशु चिकित्सा की हालत में सुधार आया है लेकिन डाॅक्टरों की कमी से परेशानियां बढ़ी हुई है। सदर अस्पताल में बाल चिकित्सा ओपीडी के अलावा नवजात शिशुओं के लिए एसएनसीयू भी खोला गया है। आधुनिक सुविधाओं से लैश सदर अस्पताल का एसएनसीयू वार्ड बीमार शिशुओं को भला-चंगा करने में सक्षम है लेकिन डाॅक्टरों की कमी से परेशानी होती है। एसएनसीयू में चार शिफ्ट के लिए चार डाॅक्टरों की जरूरत है लेकिन सिर्फ दो डाॅक्टर ही तैनात है। सही समय पर उचित स्वास्थ्य सुविधा के आभाव में नवजात को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।
नवजात में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं की समय पर पहचान कर उन्हें सुरक्षित किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए नवादा सदर अस्पताल में सिक न्यू बोर्न यूनिट की स्थापना की गई है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। एसएनसीयू में जन्म लेने के साथ ही श्वांस, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म, अविकसित शिशुओं का गंभीर स्थिति में इलाज किया जा रहा है। सदर अस्पताल में नवजात शिशुओं का इलाज शुरू होने से जन्म-मृत्यु दर में भी कमी आई है।
नवजात के लिए सुरक्षित है एसएनसीयू वार्ड एसएनसीयू वार्ड कई स्तर पर नवजात शिशुओं के लिए सुरक्षित है। एसएनसीयू पूरी तरह से वातानुकूलित है। इसमें धूल-मिट्टी का कण नहीं जा पाता है। नवजात को भर्ती कराने के बाद उनके अभिभावकों को बाहर रखा जा रहा है। यहां जन्म से 28 दिन तक के बच्चों का एडमिशन किया जाता है। एक बार यहां एडमिट होने वाले बच्चे के लिए एक साल तक फ्री में ईलाज और दवा का इंतजाम होता है। अस्पताल से निकलने के बाद भी बच्चों की निगरानी एसएनसीयू अस्पताल से निकलने के बाद भी बच्चों की निगरानी की जाती है। स्वास्थ्यकर्मी उनके परिजनों को फोन कर बच्चों का हाल-चाल लेते हैं और डाॅक्टर के अप्वाइंटमेंट की जानकारी देते हैं।
डाॅ महेश कुमार ने बताया कि एसएनसीयू से डिस्चार्ज होने के बाद भी कम वजन वाले बच्चों में अधिक खतरा रहता है। इसलिए उनका नियमित फोलोअप किया जाता है। शिशुओं के लिए क्या है सुविधाएं -धूल-कण रहित फूल एसी परिसर – वार्मर- 17 – फोटोथेरेपी- 3 सेन्ट्रलाईज आॅक्सीजन – 12 छोटे आॅक्सीजन सिलेंडर- 25 कफ निकालने की सेक्शन मशीन- 3 भाप नेमोलाईजर- 2 ऐसे बच्चों की होती है एसएनसीयू में भर्ती – जन्म के समय 1800 ग्राम से कम वजन के नवजात शिशु – निर्धारित अवधि से पहले ही जन्म लिए नवजात शिशु -स्तनपान करने में अक्षम बच्चे – गंभीर पीलिया से ग्रसित बच्चे – जन्म के समय या बाद में सांस नहीं ले पा रहे नवजात शिशु – नवजात शिशु का शरीर नीला पड़ने या रक्त स्त्राव होने पर – गंभीर दस्त से ग्रसित नवजात शिशु – जन्मजात विकृति से ग्रसित नवजात शिशु बदलते तापमान से बीमार होते हैं नवजात जन्म के करीब 6 सप्ताह बाद तक बच्चों को सबसे अधिक बीमारी तापमान बदलाव से होती है। ऐसी स्थिति में एसएनसीयू वार्ड का वातानुकूलित माहौल नवजात के स्वास्थ्य के लिए प्रभावी होता है। आईसीयू का तापमान 29 डिग्री के आसपास और बच्चे का तापमान 36.5 से 37 डिग्री रखा जाता है। निश्चित तापमान में रखने से बच्चे जल्दी ठीक होते हैं। नवादा सदर अस्पताल एसएनसीयू के अच्छे रिजल्ट आ रहें हैं। मैन पावर की कमी तो है। विभाग इसे दूर करने के लिए प्रयासरत है। डाॅ महेश कुमार, इंचार्ज एसएनसीयू, नवादा




















































































































