नवादा टुडे डेस्क
देश के नागी-गिरामी साहित्यालोचक डाॅ नामवर सिंह के निधन से जिले के साहित्यप्रेमियों में शोक की लहर है। प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े साहित्याकारों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रलेस सदस्यों ने कहा है कि देश ने एक महान साहित्य विभूति खो दिया हे। उनके निधन से साहित्य में जो रिक्तता आई है उसे भर पाना निकट भविष्य में काफी मुश्किल है । प्रगतिशील लेखक संघ नवादा के सदस्यों ने रेलवे हॉस्पिटल गार्डन में एक शोक सभा का आयोजन कर डाॅ नामवर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। शोक सभा की अध्यक्षता करते हुए जिला सचिव अशोक समदर्शी ने कहा कि नामवर सिंह हिंदी साहित्य के उन्मुक्त गगन के एक मात्र सितारा थे जिन्होंने दशकों तक प्रगतिशील साहित्य का दामन थामे रखा । खास कर प्रतिरोध की संस्कृति जीवित रखने के लिए उन्होंने कविता विधा को अचूक हथियार माना था । प्रलेस के पूर्व अध्यक्ष शम्भु विश्वकर्मा ने कहा कि आजादी के बाद के दशकों में उनकी साहित्यिक सक्रियता ने खेप के खेप साहित्यकार पैदा किया है जो विचारधारा के स्तर पर आज भी क्रियाशील हैं। एक साहित्यकार की संवेदना को उन्होंने जीवन पर्यन्त बनाये रखा और राजनीति के डगमगाते पांव को संतुलित रखने की कोशिश करते रहे ।
कामवर भी थे डाॅ नामवर
अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि डाॅ नामवर सिंह केवल नामवर ही नहीं कामवर भी थे। उन्होंने हिंदी साहित्य के नामचीन और युवा कवियों को जनमानस में स्थापित करने कीी कोशिश की । खास कर नागार्जुन जैसे कवियों की रचनाएं आलोचना की कसौटी पर रखकर उन्होंने अद्भुत कार्य किया है । दिनेश कुमार अकेला ने उनके निधन को अपूर्णीय क्षति करार दिया । मौके पर अवधेश प्रसाद, जनवादी नेता दिनेश सिंह, परमानन्द सिंह, संजय कुमार, िवनोद कुमार, दशरथ प्रसाद आदि कवि साहित्यकार और सुधिपाठक शामिल थे। अंत में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।




















































































































