धरहरा में माँ सरस्वती की प्रतिमा निर्माण करानी है तब आपको करना पड़ेगा 2034 का इंतज़ार

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इन्द्रजीत कुमार सिन्हा

पकरीबरावां प्रखंड के ढोढ़ा पंचायत के धरहरा गांव में वसंत पंचमी बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यहां एक-दो नहीं पूरे चार दिनों तक वसंतोत्सव मनाया जाता है। माँ सरस्वती की आकर्षक प्रतिमा स्थापित कर भक्तिभाव से माता की पूजा-आराधना की जाती है। यहां की माता की इतनी महिमा है कि पूजा में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु शामिल होते हैं। गाजे-बाजे के साथ भक्तिभाव से पूजन के उपरांत पूरे गांव में प्रसाद का वितरण किया जाता है। ग्रामीण व समाजसेवी चंद्रमा यादव, शिक्षक सूर्यदेव प्रसाद यादव, ज्योति पासवान, दिनेश यादव, बासुदेव यादव आदि बताते हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से माँ की आराधना कर जो भी मांगते हैं, माता उनकी मनोकामना अवश्य पूरी करती है। उन्होंने बताया कि माता की कृपा कई भक्तों पर बरसीं है। तभी तो गांव छोड़ दूसरे प्रदेशों में रहनेवाले भक्त सरस्वती पूजा में गांव अवश्य आते हैं।


बाप-दादा की परंपरा को निभा रहे लोग-धरहरा में वसंतोत्सव मनाने की परंपरा काफी पुरानी है। सात दशक पूर्व ही इसकी शुरुआत हुई थी, जहां गांव के राधेश्याम पांडेय के दादा ने ग्रामीणों के सहयोग से कैलेंडर पर ही माँ सरस्वती की पूजा धूमधाम से की थी। उनके बाद बासुदेव पासवान सहित अन्य ने पूजा का बीड़ा उठाया। बदलते समय के साथ माँ की भव्य व आकर्षक प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाने लगी। इनमें से कुछ लोग आज इस दुनिया मे भले ही नहीं  हैं, परंतु उनके द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज पांचवीं पीढ़ी के लोग निभा रहे हैं। आज चंद्रमा यादव, सूर्यदेव यादव जैसे युवा के साथ ज्योति पासवान, महादेव साव, बासुदेव यादव आदि बुजुर्ग भी बढ़चढ़ कर  पूजन में हिस्सा ले रहे हैं। ग्रामीणों का भी भरपूर सहयोग उन्हें प्राप्त हो रहा है।


वसंतोत्सव पर होता है सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन-वसंतोत्सव पर धरहरा में सांस्कृतिक कार्यक्रम व नाटक का आयोजन किया जाता है। दो दिनों तक सामाजिक तथ्यों पर आधारित नाटक का मंचन किया जाता है। अगले दिन नृत्य-संगीत का कार्यक्रम चलेगा। नाटक में गांव के ही युवा भाग लेकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। समाजसेवी चंद्रमा यादव ने बताया कि इस बार लव-कुश व बबुनी की शादी नामक नाटक का मंचन किया जाएगा। बबुनी की शादी भोजपुरी नाटक दहेज प्रथा पर आधारित है। नाटक के माध्यम से समाज को संदेश देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे युवाओं को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलता है। नाटक के मंचन से ग्रामीणों में अभी से ही काफी उत्साह है।


प्रतिमा निर्माण के लिए भक्तों की लंबी है लिस्ट

धरहरा की माँ सरस्वती की प्रतिमा निर्माण के लिए भक्तों की लंबी लिस्ट है। माता की महिमा इतनी अपरंपार है कि माँ की प्रतिमा निर्माण के लिए भक्तों में होड़ मची है। भक्त खुद के खर्च से माता की प्रतिमा का निर्माण करवाते हैं। पूजा समिति के लोगों ने बताया कि जिन भक्तों के मन में माता के प्रति श्रद्धा होती है, वे माता की प्रतिमा निर्माण के लिए आगे आते हैं। माता की प्रतिमा निर्माण के लिए वर्ष 2034 तक नम्बर लगा हुआ है। इस बार गांव के प्रसादी यादव अपने खर्च से प्रतिमा का निर्माण करवा रहे हैं। जो भक्त आगे प्रतिमा निर्माण कराना चाहते हैं, उन्हें 15 वर्ष इंतजार करना पड़ेगा।

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