अशोक प्रियदर्शी
बात शनिवार की है। करीब दो बजे विदाई कार्यक्रम शुरू हुआ। विदाई के लिए दुल्हन जैसी कार लगी थी। कार पर विदाई होनेवाले के नाम का पोस्टर भी चिपका था। अंतर इतना था कि इस कार से कोई बेटी नही, प्रभारी प्रिंिसपल की विदाई थी। लेकिन स्कूल की लड़कियां ऐसे फूट फूटकर रो रही थी, मानो वह अपने बाप से अलग हो रही हों। प्रभारी प्रिंसिपल को फूल बरसा रही थी, लेकिन फूल से ज्यादा आंसू बह रही थी। प्रभारी प्रिसिंपल जब जाने लगे तब उनका रास्ता रोक लिया। पैर पकड़ ली। जाने नही दे रही थी। फिर प्रिंसिपल के आश्वासन के बाद वह स्कूल से बाहर निकल पाए। लेकिन स्कूल के बाहर आते ही ग्रामीणों ने रोक लिया। फिर ग्रामीणों को आश्वास्त किए कि सरकारी सेवा की उम्र खत्म हुई है, उनकी सेवा जारी रहेगी। तब ग्रामीणों ने उन्हें बाहर जाने दिया।

हम बात कर रहे हैं नवादा जिले के रोह प्रखंड के ओहारी इंटर स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल यमुना प्रसाद की, जिन्होंने दस साल की सेवा अवधि में ग्रामीणों का दिल जीत लिया। यमुना प्रसाद ने कहा कि स्कूल उनके लिए घर के समान, टीचर परिवार और बच्चे को संतान जैसा मानते थे। इन सबों का प्यार हम भूला नही सकते। लड़कियां करिश्मा, कोमल, कल्याणी, विजय लक्ष्मी, श्वेता, अंशु और स्वाति समेत कई छात्राओं का चेहरा रो रो कर बुरा हाल था। लड़कियों ने कहा कि ये टीचर नही, हमारे पिता तुल्य अभिभावक थे।
ग्रामीणों के लिए क्यों प्रिय थे यमुना प्रसाद

दरअसल, 1998 में वह स्कूल में ज्वाइन किए थे। बीच में नवादा पोस्टिंग थी। लेकिन 2016 में वह प्रभारी प्रिंसिपल बने। तब स्कूल का बिल्डिंग जर्जर था। बिल्ंिडग निर्माण के लिए 21 लाख रूपए आया था, लेकिन वह वापस लौट गया था। प्रधान सचिव को पत्र लिखे लेकिन दोबारा राशि आवंटित नही की गई। लिहाजा, वह ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल के भवन को चकाचक कर दिए।

उन्होंने कहा कि वह सहयोग में राशि नहीं सिमेंट, छड़, बालू, किवाड़ लिया था। जेडीयू के लीडर और ग्रामीण मुकेश विधार्थी ने कहा कि वह भवन तक सीमित नही थे। वह छूट्टी के दिनों में भी बच्चों को पढ़ाने के लिए आते रहे हैं। सही गलत के बारे में अभिभावकों को बताते रहे हैं। टीचर नागेन्द्र उपाध्याय कहते हैं कि ओहारी से पहले मंजौर स्कूल में थे, वहां भी उन्होंने सराहनीय काम किया था। इसके चलते लोग उन्हें वहां भी याद रखते हैं।
सम्मान कार्यक्रम में लगाए गए पौधे

उनके सम्मान कार्यक्रम के अवसर पर स्कूल में पौधा रोपण किया गया, ताकि लोग पौधे से उनकी उपस्थिति का अहसास करा सके। विद्यालय परिवार ने उनके सम्मान में गीत संगीत और नाटक प्रस्तुत किया। उन्हें अंग-वस्त्र, रामायण और वस्त्र आदि दिया। उपस्थित जनों ने फूल माला देकर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर माध्यमिक शिक्षक संघ परशुराम सिंह, चन्देश्वर प्रसाद, हरिद्वार सिंह, शारदा पाण्डेय, अविनाश कुमार निराला, प्रदीप प्रसाद, चंद्रभूषण सिंह, भूषण प्रसाद सिंह, संजय सिंह, इंद्रपाल जॉन्सन, किशोरी शरण वर्मा आदि मौजूद थे। संचालन डॉ नागेंद्र उपाध्याय ने किया।
तीन संतान, सभी कर रहे नौकरी

गया जिले के वजीरगंज के कजुर निवासी यमुना प्रसाद एमएससी, बीपीएड और बीएडधारी थे। वैसे उनकी बहाली शारीरिक शिक्षक के रूप में थी। लेकिन उनकी मैथ और साइंस पर गहरी पकड़ थी। इसलिए बच्चों को साइंस पढ़ाया करते थे। उनकी अच्छी शिक्षा का असर उनके बच्चों पर बेसक पड़ा है। दो बेटे और एक बेटी है। संतोष रेलवे इंजीनियर, जबकि सुबोध शंकर डिफेंस में जेई है। बेटी नीतू आंगनबाड़ी सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं।





















































































































