नवादा टुडे डेस्क
रोह जल संचय से ही जीवन का बचाव संभव है। गुरुवार को संस्कृत प्राथमिक विद्यालय महरावां में आयोजित 52 गांवों में टिकाऊ कृषि व जल संचयन के लिए ग्राम विकास योजना निर्माण सह श्रम संस्कार विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए देश के जाने-माने पर्यावरणविद डॉ एस एन सुब्बाराव ने कही।
इसके पूर्व आहर- पईन बचाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक एमपी सिन्हा संचालन में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पर्यावरणविद डॉ एस एन सुब्बाराव, रजौली अनुमंडल अधिकारी चंद्रशेखर आजाद, नीदरलैंड के राजन मोहंती व वाटर हेड कपार्ट के भूतपूर्व चेयरमैन डॉ बी एन मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। परिचर्चा को संबोधित करते हुए आगे सुब्बाराव ने कहा कि गांव के किसानों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। तभी गांव का विकास संभव है।
साथ ही कहा कि अगर गांव के किसान पर्यावरण के बचाव के लिए एकजुट हो जाए तो सरकार के द्वारा चलाए जा रहे जल,जीवन हरियाली कार्यक्रम को अपने मुकाम पर पहुंचते देर नहीं लगेगी। आगे उन्होंने कहा कि गॉंव में जल संचय के लिए भी किसानो में जागरूकता जरूरी है। आगे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एस एन मिश्रा ने कहा कि महात्मा गांधी गांव के विकास चाहते थे।
क्योंकि देश की असली आत्मा गांव में ही बसती है। इसलिये किसान जितने अधिक से अधिक जागरुक होंगे। हमारा समाज का विकास भी उतना अधिक होगा। रजौली एसडीओ चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पर्यावरण के नुकसान के लिए हम सभी जिम्मेवार हैं। इसलिए सभी को मिलकर परिवार पर्यावरण जागरुकता के लिए कार्य करना चाहिए। तभी हम स्वच्छ जीवन जी सकेंगे।
आहर- पैन बचाओ अभियान के संस्थापक सह राष्ट्रीय संयोजक एमपी सिन्हा ने कहा की प्रखंड के 52 गांव को पुनः स्थापित करना है। इसके लिए रजाइन पैन का पूर्ण उधार जरूरी है। और यह तभी संभव जब 52 गांव के किसान एक मंच पर आकर काम करने का संकल्प लेंगे। मौके पर दिल्ली के पर्यावरणविद विजय राय, धरमेंद्र कुमार, कोडरमा के मनोज कुमार, महाराष्ट्र से आये भाई नरेंद्र, स्थनीय कृषक साधु शरण सिंह, भूतपूर्व मुखिया ओमप्रकाश कुशवाहा, योगेंद्र प्रसाद, उदय सिंह, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, राकेश रौशन, राकेश रंजन श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।





















































































































