नवादा टुडे डेस्क
सिरदला प्रखंड के गया बस स्टैंड स्थित बीएससी चाय वाले कि दुकान की चर्चा सभी के जुबान पर देखी जा रही है.आखिर दुकानदार ने क्या सोच कर नाम रखा है बीएससी चाय वाले कि दुकान । कौतूहल का विषय बना चाय की दुकान की जानकारी जब ली गयी तो मालूम हुआ कि चाय वाले दुकानदार बीएससी डिग्रीधारी है । जिनकी वेकैंसी के अभाव में बीएससी की डिग्री को दीमक चाट रही है ।
जिनकी नौकरी की आस में उम्र पार कर रही है और वेकैंसी का कोई चर्चा नही है.सिस्टम के मुंह पर तमाचा के रूप में बीएससी चाय वाले दुकान खोली गई है । जहां सरकार ही नौकरी और रोजगार के नाम पर चाय और पकौड़े की दुकान खोलने की नसीहत दी जाती है । इस बाबत जब दुकानदार से जानकारी ली गयी तो रुआंसे आवाज में बताया कि पढ़ाई में गरीबी तो बाधा था ही लेकिन वर्तमान समय मे नौकरी की आस लगाए लाखो करोड़ों विद्यार्थियों के समक्ष वैकेंसी नही आना बेहद ही चिंताजनक है ।
वर्षो से डिग्री प्राप्त कर जब नौकरी के लिए वैकेंसी नहीं आयी तो थक हार कर चाय की ही दुकान खोल ली । जर्रा बाबा एजुकेशन सोसायटी के संरक्षक रूपक कुमार ने बताया कि प्रिंस बेहद ही प्रतिभाशाली छात्र रहा है । वर्ष 2012 में 59 फीसदी मार्क्स से मैट्रिक तथा 58 फीसदी मार्क्स के साथ इण्टर तथा 53 फीसदी मार्क्स के साथ बीएससी डिग्री प्राप्त किया है । बावजूद गरीबी अभिशाप के रूप में बाधा बन कर आगे की पढ़ाई में रुकावट बना हुआ है ।
मजदूर पिता के बड़े बेटे जे रूप में घर चलाने की जिम्मवारी के साथ साथ तीन बहनों का शादी ब्याह भी उसके कंधे पर ही आ गया । नागेश्वर प्रसाद ने मजदूरी कर बेटे को पढ़ाया और सोचा कि नौकरी प्राप्त होते ही उसकी सारी परेशानी ख़त्म हो जाएगी । लेकिन विगत वर्षों में वेकेंसी की सुखाड़ ने रही सही कमर तोड़ दी । सोसायटी द्वारा चाय की दुकान खुलवाई गयी है । जिससे घर का जीविका चल रहा है ।





















































































































