पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध के अभियान से जुड़े वकील, कहा – पोर्न साइटस पर पाबंदी के लिए संसद से पारित हो सर्वदलीय कानून

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नवादा टुडे डेस्क 

पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध के अभियान में गुरूवार को नवादा जिले के कानूनविद भी शामिल हुए। नवादा के दैनिक भास्कर कार्यालय में जुटे जिले के अधिवक्ताओं ने एक सुर से पोर्न साइट्स को घातक बताया और देश की संसद में कानून बनाने की मांग की। इसके अलावा अधिवक्ताओं ने समाजिक जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि कानून के अलावा समाजिक जागृति से भी बदलाव संभव है। मानसिकता बदलेगी तो सब कुछ बदलेगा।

एडवोकेट निशा गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित चर्चा में अधिवक्ताओं ने कहा कि पोर्न साइट्स  की वजह से गैंगरेप, छेड़खानी व अश्लीलता बढी है। इसके चलते नए तरह के अपराध भी सामने आ रहें हैं। मौजूदा समय में यह एक बड़ी चुनौती है। कानून के माध्यम से बड़ी-बड़ी समस्याओं का हल हुआ है। इस समस्या को हल करने के लिए भी कड़े कानून बने। सरकार को हरहाल में पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। 

पोर्न साइट्स के चलते युवा और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इससे बच्चे लक्ष्य से भटक जाते हैं। जिस समय उनके व्यक्तित्व का विकास होना होता है उसी समय उनका भटकाव हो जाता है। यह घातक है। सरकार को अविलंब हस्तक्षेप करना चाहिए। 

हालत ऐसे हैं कि कोई भी शहर, नाम सर्च करों र्पोन के कंटेंट आने लगते हैं। ऐसे में बच्चों को जाने-अनजाने में पोर्न साइट्स तक पहुंच हो जाती है। इससे सामाजिक मूल्यों में गिरावट हो रही है। बच्चों को इसकी लत हो जाती है और कम उम्र में गलत कर बैठते हैं। 

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि न्यूज पोर्टल सहित अन्य साइटो पर पोर्न साइट्स के लिंक मिल जाते हैं। इससे बच्चों की उत्सुकता बढ जाती है। यह खतरनाक है। इसके विज्ञापन ऐसे भ्रामक होते हैं कि लोग बिना देखे रह नहीं सकते। इससे परेशानी बढी है। तुरंत बंद कर दिया जाय।-  

पहले पोर्न बहुत सहज नही था। चुनिंदा लोगों तक इसकी पहुंच थी। लेकिन अब घर बैठे एक-दो क्लिक में यह उपलब्ध हो रहा है। इससे समाजिक विकृति फैल रही है। यौन कुंठाएं आ रही है। संबंधों में भी तनाव हो रहें हैं। इसपर कदम उठाए जाने की जरूरत है।

पोर्न साइटस राष्ट्रद्रोह से भी बड़ा अपराध कर रहा है। यह पूरे देश को मानसिक और यौन विकृति की ओर धकेल रहा है। इससे पूरा राष्ट्र की संस्कृति और प्रतिष्ठा को आघात पहुंच रहा है। साइट्स को बंद किए जाने से मानसिकता चेंज तो नहीं हो सकता है लेकिन बुरे असर को कम किया जा सकता है। 

-सूर्य प्रकाश कुमार,अधिवक्ता आज कल पोर्न साइट अपराधों का प्रेरक बना हुआ है। यौन अपराध से जुड़े मामले में इसका काफी योगदान है। इन्हें तुरंत बंद करना चाहिए। इससे लोग वहशी होते जा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान लड़कियांे को हो रहा है। इससे न सिर्फ लड़कियों का जीवन बर्बाद हो जाता है बल्कि लड़कों का भी कैरियर तबाह हो जाता है।  

बच्चों को पोर्न साइट्स का प्रभाव से बचाने के लिए अभिभावकों को सजग रहने की जरूरत है। हम बच्चों को तुरंत मोबाईल थमा देते। उसके मोबाईल चलाने पर गर्व महसूस करते हैं। ऐसी आदतों से बाज आना होगा। बच्चे जिज्ञासु होते हैं। वे हर नई चीज को जानना चाहते है। उन्हें अच्छा संकेत और संदेश देने की जरूरत है।

पोर्न साइट्स के असर को कम करने के लिए हमें भी जागरूक होना पड़ेगा। हमें बच्चो से खुलकर बात करनी चाहिए। ताकि उन्हें सही-गलत का ज्ञान हो। बच्चों की निगरानी करें। उन्हें बेलगाम नहीं छोड़ना है। बाकि काम सरकार की  है। सरकार भी इसे गंभीरता से ले। 

साइंस के जमान में टेक्नाॅलोजी से दूर नही किया जा सकता है। लेकिन जरूरत है टेक्नोलाॅजी का सही इस्तेमाल किए जाने की। लेकिन लोग टेक्नाॅलोजी के जाल में फंसने लगे हैं। इसका असर अब समाज में दिखने लगा है।

पहले लोग गिफट में कापी और किताब दिया करते थे। लेकिन अब मोबाइल देने लगे हैं। लेकिन उन्हें नही पता कि स्मार्ट फोन के जरिए घरों में पोर्न प्रवेश कर गया है। लोगों को इसकी पता भी नही चल रही है।

-सुचित कुमार, अधिवक्ता सभी दलों के लोगों को इसपर पहल करने की जरूरत है। पोर्न साइटस के जाल में सिर्फ एक दल के लोग शिकार नही हो रहे हैं। ऐसे में सभी को इस दिशा में पहल करने की आवश्यकता आ गई है। 

-सुनील कुमार सिंह, अधिवक्ता आज परिवार के पास स्मार्ट फोन है। ऐसे में यह एक बड़ा खतरा है। अभिभावकों को भी सतर्क रहना होगा। पोर्न साइट्स कई भ्रामक प्रचार बांट रहें हैं। इससे साईबर अपराध के भी मामले सामने आ रहें हैं। साइबर क्राइम के मामले में कानून को और मजबूत बनाने की जरूरत है। 

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