श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत गांधी इंटर स्कूल में परिचर्चा का आयोजन

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नवादा टुडे डेस्

नवादा नगर के गांधी इंटर विद्यालय में एक भारत, श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत शिक्षकों और छात्रों ने देश के दो प्रमुख पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा और मिजोरम के बारे में जानकारियों को साझा किया। विद्यालय के प्राचार्य अफजल सआदत हुसैन के मार्गदर्शन में आयोजित परिचर्चा में शिक्षक प्रभात कुमार ने त्रिपुरा के बारे में कई रोचक जानकारी देते हुए बताया कि त्रिपुरा राज्य का गठन 21 जनवरी, 1972 में हुआ था।

अगरतला इसकी राजधानी है। और यहां की मुख्य भाषाएं बंगाली, ककबरक, और अंग्रेजी है। भारत के तीसरे सबसे छोटे राज्य त्रिपुरा का नाम वहां की एक स्थानीय देवी त्रिपुर सुंदरी के नाम पर है। वहां का त्रिपुर सुंदरी मंदिर देश भर में फैले 51 शक्तिपीठ मंदिरों में एक है।यह राज्य प्राचीन जनजातीय संस्कृति का प्रमुख केन्द्र है।

त्रिपुरा के उनोकोटि की दुर्गम पहाड़ियों में पत्थर काट कर बनाए गए हिन्दू देवी देवताओं की विशाल मूर्तियां आश्चर्यजनक हैं। इतिहासकारों के अनुसार ये मूर्तियां 7वीं से 9वीं सदी की हैं। राज्य के आधे से अधिक भाग जंगलों से घिरा है। राज्य के कृषि योग्य भूमि पर मुख्य रूप से चावल की खेती होती है। दुर्गा पूजा राज्य का मुख्य त्योहार है और यहां का उज्जयंत महल पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय है।

मिजोरम के बारे में जानकारी साझा करते हुए शिक्षिका दरख्शां ने बताया कि देश में बांस का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले राज्य मिजोरम की राजधानी आइजोल है। राज्य का गठन 20 फरवरी, 1987 में हुआ था। झूम खेती के लिए प्रसिद्ध पर्वतीय राज्य मिजोरम की प्रमुख भाषाएं मिजो, अंग्रेजी और हिन्दी है। चपचार, मिमकुट और थालफ वांगकुट यहां के प्रमुख त्योहार हैं। यहां की ज्यादातर जनसंख्या ईसाई धर्म को मानती है। मिजोरम के जंगलों का 91प्रतिशत भाग बांस के जंगल का है।

हर 48 साल में बांस के में फूल आते हैं और तब पूरे राज्य में चूहों की संख्या अचानक से बढ़ जाती है। जो रैट फ्लड के नाम से जाना जाता है। इस घटना से पूरे राज्य में अकाल पड़ जाता है। और बड़ी संख्या में लोग राज्य से पलायन कर जाते हैं। मिजोरम की साक्षरता दर 91 प्रतिशत से भी ज्यादा है।

ज्ञात हो कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम की शुरुआत 31 अक्टूबर, 2015 को सरदार पटेल के जन्मदिन पर की गयी थी जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति से छात्र – छात्राओं को परिचित कराना है।

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