अशोक प्रियदर्शी
45 साल पहले की बात है। औरंगाबाद और नवादा को जिला बनाया जाना था। लेकिन औरंगाबाद को जिला का दर्जा घोषित कर दिया गया। लेकिन नवादा को जिला का दर्जा नही दिया जा सका। तब बिहार के मंत्री रहे हिसुआ के विधायक शत्रुधन शरण सिंह उर्फ शत्रुधन बाबू अड़ गए। उसके बाद 26 जनवरी 1973 को नवादा को जिला के रूप में दर्जा दिया गया। उसके बाद गया से अलग नवादा जिला के रूप में स्थापित हुआ था। नवादा को जिला के रूप में स्थापित करने का श्रेय शत्रुध्न बाबू को जाता है। तब बिहार के मुख्यमंत्री केदार पांडेय थे। बता दें कि शत्रुधन बाबू कांतिकारी थे। वह गया कंसीपाइरेसी केस में शत्रुध्न बाबू और श्याम बर्थवार को कालापानी की सजा हुई थी।
विकास की गति बढ़ाने में लोगों की भूमिका रही सुस्त
देखें तो, जिस उत्साह से शत्रुध्न बाबू ने जिला के गठन में अपनी भूमिका निभाई, उस उत्साह को आगे बढ़ाने में लोगों ने सुस्ती दिखाई। यही वजह है कि नवादा आज भी देश के पिछड़े जिलों में शुमार है। वरिष्ठ साहित्यकार राम रतन प्रसाद सिंह रत्नाकर ने कहा कि अनुग्रह बाबू और आंदोलनकारियों जैसी दिलचस्पी लोगों को नही है। यही कारण है ऐतिहासिक और पुरातात्विक रूप से महत्वपूर्ण नवादा का अपेक्षित विकास नही हुआ है।
ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण है नवादा
नवादा ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है। यह मगध का प्रमुख हिस्सा रहा है। जिले के अधिकतर गांवों में कोई न कोई ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थल रहे हैं। लेकिन अपेक्षित विकास नही हो सका। लिहाजा, पर्यटकीय संभावनाओं के बावजूद उसका विकास नही हो सका। शिक्षक डाॅ मिथिलेश कुमार सिन्हा बताते हैं कि नवादा के अतीत की चर्चा ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज है। लेकिन इसका समुचित विस्तार नही किया जा सका।
नरेंद्रपाल सिंह की रही उल्लेखनीय भूमिका
नवादा के स्थापना के बाद पहले जिलाधिकारी नरेंद्रपाल सिंह के बिना विकास की बात शुरू नही की जा सकती है। नरेंद्रपाल सिंह के प्रयास से नारद संग्रहालय की स्थापना की गई। यह बिहार का दुर्लभ संग्रहालय है। यह जन सहयोग से स्थापित किया गया। यही नहीं, उनके संरक्षण में प्रो हरिश्चंद्र प्रियदर्शी और प्रो लक्ष्मीचंद्र प्रियदर्शी द्वारा जिला की स्थापना से संबंधित स्मारिका प्रकाशित किया गया है। यह आज भी उपयोगी है।
पूरा भेल शत्रुधन के वादा हो दादा
कारीसोवा निवासी कवि जयराम सिंह का मगही गीत काफी प्रचलित हुआ था। पूरा भेल शत्रुधन के वादा हो दादा, बन गेल जिला नवादा हो दादा के गीत आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है।





















































































































