ओंकार कश्यप
हिसुआ- नरहट खनवां रोड में हिसुआ बाजार से निकलने के बाद सड़क का नजारा किसी बड़े शहर सा दिखता है। शाम होते ही सड़क किनारे लगे एलईडी लाईट की दूधिया रौशनी सड़क को नहा देती है। राहगीरों को आधी रात में भी दो कीलोमीटर तक अंधेरा और भय नहीं लगता जबकि कुछ माह पहले तक सड़क के इसी हिस्से में लोग सबसे ज्यादा भयभीत होते थे। यह परिवर्तन झिकरूआ गांव के कुछ उत्साही युुवाअाें के कारण दिख रहा है, जिन्होंने लक्ष्मी पूजा महोत्सव से बच्चे पैसे से सड़क पर एलईडी लाईट की लड़ी लगा दी है।
महादेव मोड़ रेलवे गुमटी से लेकर झिकरूआ सूर्य मंदिर तक करीब दो किलोमीटर तक सड़क किनारे करीब 100 से अधिक लाईट लगाए गए हैं। नरहट प्रखंड के झिकरूआ गांव के कन्हैया कुमार, छोटू कुमार, राजीव कुमार, बिक्की कुमार, सूरज कुमार , गोलू कुमार, सुमित कुमार, मोनू कुमार, आयुष, शुभम कुमार, शिवम कुमार, मैट्रिक-इंटर के छात्र है। अपनी परीक्षा की तैयारी के साथ ही गांव की सामाजिक और सास्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं। इंटर के छात्र कन्हैया कुमार ने बताते हैं हम सभी छात्र आर्दश युवा नाट्यकला परिषद, लक्ष्मी पूजा समिति , छठ पूजा समिति तथा सरस्वती पूजा समिति से भी जुड़े हैं।
गांव के दामन पर न लगे बदनामी के दाग
झिकरूआ निवासी सतीश सिंह, दीपक सिंह, सोनू कुमार बताते हैं कि गांव के लड़कों ने बेहद साहसिक और समझदारी भरा काम किया है। कन्हैया के अनुसार हिसुआ-नरहट रोड में हिसुआ के बाद सबसे पहले झिकरूआ गांव पड़ता है। आए दिन आदित्य सिंह उच्च विद्यालय और उसके आस-पास में छिनतई की घटनाएं हो जाती थी। इन घटनाओं में रोड के आस-पास के गांवों की बदनामी होती थी। रोड से एकदम सटे होने के कारण झिकरूआ गांव की बदनामी ज्यादी होती थी। इसलिए हमलोगों ने सड़क किनारे लाईट लगा दी है।
पैकेट मनी से लगाई लाईट
कन्हैया ने बताया कि लक्ष्मी पूजा के बाद बची राशि अाैर आपस में चंदा कर पैसे का इंतजाम किया है। अब सड़क का लुक भी अच्छा लगता है। यह सुरक्षा के हिसाब से भी ठीक है। हमलोग आगे भी कुछ बेहतर करने की कोशिश करेंगे।
हर रात गुजरते है हजारों लोग
हिसुआ- खनवां पथ काफी व्यस्त सड़क है। यह सड़क हिसुआ को शेखपुरा, नरहट, लौंद, पदमौल, बीजू बिगहा, सिरदला और रजौली आदि बजारों को जोड़ती है। रोज शाम में सैकड़ों छोटे-बड़े व्यापारी , दुकानदार ,फेरीवाले इस सड़क से गुजरते हैं। इसके अलावे हिसुआ से ट्यूशन पढ्कर दर्जनों गांवों की सैकड़ों छात्राएं लौटती है । सड़क पर लाईटिंग हो जाने के कारण हजारों लोग सहज महसूस करते हैं।




















































































































