एडमिशन के लिए टेस्ट देने बंगलोर गई थी संजना, दाखिला भी हुआ, साथ में मेडल भी लाई

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sanjna sharma

सोनू कुमार

बिहार के नवादा ज़िले के नारदीगंज की संजना ने बंगलोर में जेब्रोनिक्स, इंडियन एक्सप्रेस,जी फाइव कम्पनी और फोनिक्स हॉस्पिटल के तरफ से कराई गई गेम में पार्टिसिपेट होकर 10 किलोमीटर के दौड़ में गोल्ड मेडल और 10 हजार रूपए की चेक हासिल की है। संजना को जेब्रोनिक्स और जी फाइव कम्पनी की तरफ से ऑफर भी मिला है। संजना पीटी उषा एथेलिटिक्स इंस्टिट्यूट बंगलोर में एडमिशन के लिए टेस्ट के लिए गई थी। वहां एडमिशन में भी जगह बनाई और गोल्ड मेडल एवं दस हजार रूपए की चेक प्राप्त की।

10 साल से कर रही रनिंग, दौड़ प्रतियोगिता देखने के बाद से प्रैक्टिस में जुटी संजना

जब 10 वर्ष की उम्र में पिता के साथ स्टेडियम में स्पोट्र्स देखने के लिए गई थी तो अपने मन में यह ठान ली थी कि हम भी अपने जिले और देश का नाम रोशन  करूंगी । उसी समय से 10 साल की उम्र से ही सजना लगातार रनिंग कर रही है।- नेशलन स्तर की प्रतियोगिता के लिए कर ही तैयारीनारदीगंज प्रखंड के सहजपुरा निवासी सेना नायक पद पर कार्यरत संतोष कुमार की 14 वर्षीय पुत्री संजना शर्मा दौड़ में जिले व राज्य का नाम रोशन कर रही है। संजना फिलहाल कोलकता में पढ़ाई कर रही है। वहीं से वह राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेती है। वह 3000 मीटर और 1500 मीटर में प्रथम स्थान लाकर गोल्ड मेडल प्राप्त की है । प्रथम स्थान प्राप्त करने पर आर्मी के सर्वोच्च पदाधिकारी जीओसी के द्वारा गोल्ड मेडल भी प्रदान किया। संजना शर्मा का सलेक्शन नेशनल दौड़ के लिए हुआ है। जिसका दौड़ 17,18 एवं 19 जून को दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में होगा। इसकी तैयारी के लिए वह प्रतिदिन 30-35 किमी तक लगातर दौड़ कर रही है। 

– पिता का मिलता है भरपूर सहयोग

संजना बताती है कि पिता का पूरा सहयोग मिलता है। अभी तक 8 गेम में भाग लिया गया है। जिसमें 5 गेम में गोल्ड मेडल,1 गेम में ब्राउन मेडल ,1 गेम में सिल्वर मेडल मिला है। रेलवे की ओर से हुई दौड़ में भी भाग लिया लेकिन फेयर परिणाम नहीं होने से चैथे स्थान पर रहा। वह बताती है कि  राज्य स्तरीय पश्चिम बंगाल में सेंट्रल स्कूल बिनागुड़ी के तरफ से गेम खेलने का मौका था। जिसमें अंडर 17 के सभी स्टूडेंट को भाग लेना था। इसमें 14 साल 3 माह की उम्र में भाग लिया। राज्य स्तरीय पश्चिम बंगाल के चितरंजन में कुल 27 विद्यालय के बच्चे भाग लिए थे सभी विद्यालय के बच्चे अपने अपने अलग तिरंगे रखकर दौड़ लगा रहे थे।

इस दौड़ में प्रथम स्थान लाए पुरस्कार पाते हुए सभी का आशीर्वाद प्राप्त किए। आर्मी के नायक पद पर कार्यरत संतोष कुमार कहते हैं कि अपने बच्चों के साथ स्पोट्र्स देखने गया था। उसी समय से संजना भी रनिंग के लिए जिदृद करने लगी। उसकी जिद्द पर हामी दे दी और उसके बाद वह निरंतर सफल होते रही।  अब तो ये स्थिति है कि दौड़ कहीं भी हो संजना को मालूम हो जाता है तो उसमें पार्टिशिफेट से नहीं चुकती है। जहां भी गई उसे सफलता मिलती गई यही कारण रहा कि इसके हौसलै हमेशा बुलंद रहे और आगे बढ़ती रही।

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