पोर्न के खिलाफ प्रतिबंध में शामिल हुए प्रोफेसर्स, कहा- परिवार, समाज और देश को पहुंचा रहा आघात

0
1054

अशोक प्रियदर्शी

     पोर्न के खिलाफ प्रतिबंध का अभियान अब बड़ा आकार ले रहा है। रविवार को दैनिक भास्कर कार्यालय में टीएस काॅलेज हिसुआ के प्रो शिवेन्द्र नारायण सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक में चर्चा की गई कि पोर्न से परिवार, समाज और देश को गहरा आघात पहुंच रहा है। इसके प्रभाव से कोई अछूता नही है। इस पर जितनी जल्दी हो सके प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इसके लिए मैकनिज्म नही है तो मैकनिज्म विकसित किया जाना चाहिए। प्रोफसर्स ने कहा कि इसके लिए सख्त कानून के अलावा जागरूकता और आंदोलन जरूरी है। यह सिर्फ उपदेश से खत्म नही होगा। हमसबांे को अगुआ बनने की जरूरत है। बहुत देर हो चुकी है। समय रहते पहल नही हुआ तब देश को बड़ा नुकसान पहुंचनेवाला है। दैनिक भास्कर का यह पहल सराहनीय है।

जागरूकता लाने की हो पहल


पोर्न समाज में बुराइयों के रूप में सामने आया है। इससे समाज और देश को नुकसान पहुंच रहा है। अब इससे हर कोई निजात पाना चाह रहा है। लेकिन इसकी पहल नही हो पा रही है। दैनिक भास्कर ने इसकी शुरूआत कर बड़ा सराहनीय काम किया है।
-कौशलेंद्र कुमार, मनोविज्ञान, एसकेएम काॅलेज, नवादा,

सामाजिक दबाव से बंद होगा पोर्न
     राजनेता इसके लिए खुद जिम्मेवार रहे हैं। ऐसे में पोर्न पर पाबंदी के लिए हम राजनेताओं के भरोसे नही सकते। यह सामाजिक दबाव से ही बंद हो सकेगा। जिस समाज का बुद्धिजीवी चुप हो जाएगा वह समाज मर जाएगा। हमसबों को आगे आने की जरूरत।
-डाॅ राजकुमार ओझा, भोजपुरी, महिला काॅलेज, वारिसलीगंज,

समाज और व्यवस्था जिम्मेवार
पोर्न के लिए कोई वैधानिक चेतावनी नही है। इसपर प्रतिबंध होनी चाहिए। लेकिन इसका निदान सिर्फ कानून से संभव नही है, क्योंकि सिगरेट और सिनेमा में वैधानिक चेतावनी के बावजूद लोग इसके आदि हो जाते हैं। समाज और व्यवस्था दोनों को इसपर पहल करने की जरूरत है।
प्रो रवींद्र कुमार, भूगोल, महिला काॅलेज, वारिसलीगंज

सेक्स एजुकेशन को पाठयक्रम में शामिल करने की जरूरत
      पोर्न पर नियंत्रण के लिए सेक्स एजुकेशन को भी पाठयक्रम में शामिल किए जाने की जरूरत है। इसके लिए एक व्यक्ति और एक सभ्यता जिम्मेवार नही है। पोर्न की ओर मुखातिब होने में अश्लील साहित्य की भी भूमिका रही है। इसपर भी चेक एंड बैलेंस की जरूरत है।
-नागेन्द्र कुमार, अंग्रेजी, एसकेएम काॅलेज, नवादा

पोर्न की वजह से बढ़ रहा प्रजनन दर
पोर्न की वजह से प्रजनन दर बढ़ रहा है। अमेरिका और जापान जैसे राष्ट्रों में भारत की तुलना में प्रजनन दर कम है। लेकिन जिन राष्ट्रों बंगलादेश, नेपाल और भारत में पोर्न ज्यादा देखा जाता है, वहां प्रजननदर अधिक है।
-प्रो अरूण कुमार, अर्थशास्त्र, एसकेएम काॅलेज, नवादा

हर तकनीक के होते हैं दो पक्ष
हर तकनीक उभयधर्मी होता है। यह वरदान भी है और अभिशाप भी। हर मानव में गुड सेंस और बैड सेंस होता है। पोर्न बैंड सेंस को बढ़ाने में उत्प्रेरक का काम कर रहा है। लोग अच्छे काम के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब कोई बैड सेंस हावी हो जाता है तब परेशानी का सबब बन जाता है।
-डाॅ अरविंद कुमार, रसायनशास्त्र, एसकेएम काॅलेज, नवादा

व्यापक जागरूकता अभियान की जरूरत
      पोर्न के कारण समाज आपराधिक प्रवृति की ओर बढ़ रहा है। बाहरी मनोभाव को कानून से नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन आतंरिक मनोभाव को नैतिकता से ही नियंत्रित किया जा सकता है। लोगों में नैतिक जिम्मेदारी सुनिश्चित कराने के लिए स्कूल, काॅलेज समेत हर स्तर के संस्थानों में जन जागरूकता चलाने की जरूरत है।
-प्रो अंजनी कुमार, राजनीतिशास्त्र, टीएस काॅलेज, हिसुआ

सख्त कानून के बिना नियंत्रण संभव नही
पोर्न समाज में जहर की तरह फैल रहा है। इसका प्रभाव समाज पर इस कदर बढ़ गया है कि इसपर नियंत्रण के लिए सख्त कानून की आवश्यकता है। लोगांे को इसकी बुराइयांे से अवगत कराने के लिए जन आंदोलन की भी जरूरत है। प्राइवेसी के नाम पर पोर्न को बढ़ावा नही दिया जा सकता है।
-डाॅ बच्चन कुमार पांडेय, प्रिसिंपल, एसकेएम, काॅलेज, नवादा

अंधानुकरण से गलत दिशा में बढ़ रहा समाज
मानव को अंधानुकरण की प्रवृति रही है। समाज को अपनी प्रवृति, परिवेश और संस्कृति को ध्यान मंे रखकर ही किसी का अनुकरण करना चाहिए। लेकिन आधुनिकता के नाम पर लोग अंधानुकरण कर रहे हैं। यह समाज को गलत दिशा में ले जा रहा है। प्रतिबंध एक मात्र उपाय नही है, मनोवृति में बदलाव जरूरी है।
-प्रो योगन्द्र प्रसाद सिंह, दर्शनशास्त्र, मगध यूनिवर्सिटी, बोधगया

उपदेश नही व्यवहार में लाने की जरूरत
भारतीय परंपरा में सेक्स और साहित्य चर्चा होती रही है। लेकिन उसकी एक मर्यादा रही है। अब आवश्यकता से अधिक होने से यह कैंसर जैसी खतरनाक हो गई है। उदारीकरण और वैश्वीकरण के कारण साधन की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे पोर्न को बढ़ावा मिला है। लेकिन इससे उपदेश से नही व्यवहार में लाने से मुक्ति मिलेगी।
-डाॅ महेन्द्र प्रसाद, हिंदी, आरएमडब्लू, काॅलेज, नवादा

भारत की खासियत को बना दिया कमजोरी
भारत में सेक्स और साहित्य की चर्चा रही है। लेकिन संचार क्रांति आने के बाद पश्चिमी देशों ने भारत की इस खासियत को कमजोरी बना दिया है। आधुनिकता के नाम पर पोर्न का बड़ा बाजार खड़ा किया जा रहा है। इसके नुकसान के बारे में लोगों को बताने की जरूरत है।
-उमेश प्रसाद सिंह उमा, कवि और साहित्यकार, नवादा

हम बदलेंगे, युग बदलेगा
हम सभी पोर्न के मकड़जाल में फंस गए हैं। इससे निकलने की जरूरत है। इसके लिए बुलंद हौसले की जरूरत है तभी नतीजा सामने आ सकेगा। लेेकिन इसके लिए हम बदलेंगे युग बदलेगा की तर्ज पर काम करना होगा।
-प्रो रामोवतार शर्मा, प्राचीन इतिहास, एसकेएम काॅलेज, नवादा

अच्छे परिवेश से दूर होगी पोर्न संस्कृति
समाज के निर्माण में परिवेश और संस्कृति की अहम भूमिका रही है। लेकिन खराब परिवेश के कारण पोर्न जैसी अपसंस्कृति विकसित हो रही है। इसमें महिला और पुरूष का भेद मिट गया है। उम्र भी कोई मायने नही रख रहा है। जितना जल्दी हो सके, इसपर नियंत्रण किया जाना चाहिए।
-प्रो शिवेन्द्र नारायण सिंह, अर्थशास्त्र, टीएस काॅलेज, हिसुआ

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here