ऋृंगी ऋषि पहाड़ी पर राजा दशरथ को मिला था वरदान, तब से ऋृंगी पहाड़ी पर हो रही है पूजा

0
1710
ऋृंगी ऋषि पहाड़ी

 संतोष कुमार सिंह    बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड के हरदिया पंचायत अंतर्गत श्रृंगी ऋषि पहाड़ी पर  भव्य मेला का आयोजन किया गया। इसमें नवादा, गया, नालंदा, शेखपुरा, और आसपास जिले के अलावा झारखंड की सीमा से सटे आबादी के लोग पहुंचे हैं। वसंत पंचमी के दिन श्रृंगी ऋषि पहाड़ी पर पूजा अर्चना की जाती है।बेटा पैदा होने पर फहराते हैं पताखा श्रद्धालुओं की आस्था है कि वसंत पंचमी के दिन पूजा अर्चना करने से मन की मुरादें पूरी होती है। पुत्र की मनोकामना भी पूरी होती है। पुत्र की प्राप्ति के बाद लोग पहाड़ के उपर श्रृंगी ऋषि बाबा के स्थान पर पताका लगाकर धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। यहीं नहीं, सैकड़ों महिलाओं ने साड़ी के आंचल को फाड़कर श्रृंगी ऋषि पर्वत पर लगे अदभुत चमेली के पेड़ में बांधी। बताया जाता है कि पुत्र रत्न की प्राप्ति होते ही लोग अपने बांधे गए साड़ी के फटे हुए आंचल को खोल कर घर लाते हैं। फिर घर के पूजा स्थल में रखकर उस लाए हुए कपड़े का पूजा-पाठ किया जाता है। पहाड़ी के ऊपर एक छोटा सा गुफा है जिसमें चूहा का आवागमन होता है। आस्थावानों का मानना है कि मन्नत पूर्ण होने पर यह चूहा भगवान के रूप में दर्शन देता है। लोगों का मानना है कि राजा दशरथ को चार पुत्र रत्न की प्राप्ति इस श्रृंगी ऋषि पहाड़ी के ऊपर यज्ञ करने से हुई हुई थी। तब से निसंतान दंपत्ति पुत्र की चाह में इस पर्वत पर आकर पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। लोगों का मानना है कि श्रृंगी ऋषि के आशीर्वाद से हजारों दंपतियों को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है।  पुजारी अनिल पांडे ने बताया कि मन्नत पूर्ण होने पर अपने पुत्र का मुंडन संस्कार श्रृंगी ऋषि पर्वत के ऊपर करते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here