एनआरसी,एनपीआर और सीएए देश को बांटने वाला कानून-मसीह उद्दीन संविधान बचाओ संघर्ष मोर्चा

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नवादा टुडे डेस्क

कौआकोल में एनआरसी, सीएए और एनपीआर के खिलाफ गुरुवार को हजारों की तादाद में भीड़ सड़कों पर उतर आई। संविधान बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले भाकपा माले एवं राजद समर्थकों के अलावे मुस्लिम समुदाय के हजारों लोगों ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए काला कानून के विरोध में मौन जुलूस निकाला और अपना आक्रोश जताया। कौआकोल के टीएसएम स्कूल के पास से निकाली गई विशाल जुलूस जोगाचक,कौआकोल बाजार होते हुए प्रखण्ड कार्यालय पहुंची,जहां एक शिष्टमंडल द्वारा बीडीओ को ज्ञापन सौंपा गया।

उसके बाद पुनः वहां से जुलूस निकलकर बिझो मार्ग होते हुए सभास्थल तक पहुंची। जहां लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सैयद मसीह उद्दीन ने एनआरसी, सीएए और एनपीआर को काला कानून करार देते हुए इसे वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जनता की आवाज की अनसुनी की तो ऐसे नेताओं को सत्ता से उतारने का काम भी जनता ही करेगी। इसके पूर्व हाथों में सीएए और एनआरसी विरोधी नारों की तख्तियां थामे और तिरंगा लहराते हुए भीड़ ने कानून के खिलाफ मौन जुलूस निकालकर जमकर विरोध जताया। जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति की नौबत न आने को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह तैयार थी।

थानाध्यक्ष मनोज कुमार के नेतृत्व में अलग अलग सवेंदनशील स्थानों पर पुलिस बल मौजूद रहे। स्वयं थानाध्यक्ष दल बल के साथ जुलूस के पीछे पीछे चल रहे थे। सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे मुस्लिम समुदाय ने एक स्वर में इस तरह के कानून को जनहित के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार पर देश को बांटने की कोशिश का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष कमरुलबारी धमौलवी, भाकपा माले के नरेंद्र प्रसाद सिंह, किशोरी प्रसाद, दिलीप कुमार, भाकपा के उत्तम कुमार, मोर्चा के अध्यक्ष हसरत आलम, राजद के प्रखण्ड अध्यक्ष कैलाश प्रसाद यादव, महबूब आलम, पूर्व मुखिया महमूद आलम, मुजफ्फर अंसारी, शमीम अख्तर, मोहम्मद मूसा, दानिश इकबाल, मोहम्मद अराफात आलम, इलियास राजवी आदि लोगों ने मौन जुलूस में हिस्सा लेकर अपना विरोध जताया।

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