अशोक प्रियदर्शी
फिल्म पानीपत में इतिहास, शौर्य, जबांजी, प्रेम और बलिदान की अदभूत कहानी है। इस ऐतिहासिक कहानी पर केन्द्रित फिल्म की कहानी का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया है। अभिनेता अर्जुन कपूर, संजय दत, कृति सैनन, मोहनीश बहल, पदमिनी कोल्हापुरे, नवाब शाह, जीनत अमान, सुहासिनी मुले, अभिषेक निगम फिल्मी कलाकार है, जिन्होंने अभिनय किया है। पानीपत फिल्म का स्टोरी राइटिंग और स्क्रीन प्ले रंजीत बहादुर ने किया।
चौकानेवाली बात यह कि इस ऐतिहासिक फिल्म पानीपत के स्टोरी राइटिंग करनेवाला शख्स रंजीत बहादुर बिहार के एक गांव बुधवारा से हैं। रंजीत की कहानी को मशहूर निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने पसंद किया। गोवारिकर ने लगान फिल्म का निर्देशन किया है। रंजीत बहादुर का यह अकेला उपलब्धि नही है। दर्जनों फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 16 साल पहले मिला था ब्रेक रंजीत बहादुर को पहला मौका निर्देशक सुधीर मिश्रा ने दिया था। चमेली फिल्म में फिल्म एडिटर था।
यही नहीं, राजकुमार हिरानी की फिल्म थ्री इडियट्रस फिल्म में डायलाॅग सुपरवाइजर के रूप में काम किया। फरारी की सवारी फिल्म में एसोसिएट डाॅयलाग रायटर के रूप में काम किया। शुरूआत फिल्म एडिटिंग से रही है। लेकिन पानीपत में स्टोरी राइटिंग और स्क्रीन प्ले सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। रंजीत बहादुर कहते हैं कि निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने उन्हें इस विषय पर स्टोरी लिखने को कहा था।
बचपन से थी स्टोरी राइटिंग का स्कील
रंजीत का बचपन से स्टोरी राइटिंग स्कील रहा है। जब वह आठवीं कक्षा में थे तब उनकी संस्कृत टीचर दया दवे को एक प्रोजेक्ट मिला था। उस टीचर ने उन्हें तीन तस्वीरें दी थी, जिसके आधार उन्होंने तीन कहानियां लिखी थी। रंजीत बहादुर के मित्र कौशलेन्द्र नारायण सिंह कहते हैं कि बचपन से काफी तेज था। दिल्ली यूनिवर्सिटी मंे आकार मिला। रंजीत बताते हैं कि अंतर काॅलेज प्रतियोगिता थी।
24 घंटा पहले नाटक की सूचना मिली थी। रंजीत कहते हैं कि इस अंतराल में नाटक की स्टोरी लेखन और मंचन किया। तब पुरस्कार मिला था। काफी तारीफ हुई थी। रंजीत कहते हैं कि उन्हें कोई एक दिन में फिल्म की ओर रूझान नही हुआ। कई अवसर पर उनकी तारीफ होती रही। यह सबसे बड़ी वजह रही है। पारिवारिक पृष्ठभूमि नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के बुधवारा गांव निवासी 48 वर्षीय रंजीत बहादुर एक भाई और दो बहने हैं। यह गांव काफी पिछड़ा माना जाता रहा है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
फिल्म से इतर रहा है। उनके पिता राम रतन सिंह ट्रांसपोर्टर रहे हंै। इसके बावजूद रंजीत मुंबई में अपनी पहचान कायम किया है। रंजीत की शुरूआती पढ़ाई संत जोएसएफ स्कूल नवादा में हुई। फिर स्काॅलरशिप की मदद से 10वीं तक उदयपुर में पढ़ाई की। 12वीं पिलानी से किया। जबकि दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज काॅलेज से फिजिक्स से ग्रेजुएशन किया। उसके बाद कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टीवी इंस्टीच्यूशन से पीजी किया।





















































































































