ओंकार कश्यप। अमित कुमार
सिपाही बनने के लिए परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों की परीक्षा तो दो घंटे की थी लेकिन इसके लिए उन्हें 24 घंटे तक ठंड, कुव्यवस्था और अफरातफरी के सामने धैर्य परीक्षा देनी पड़ी।
नवादा सिपाही बनने की चाहत में परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों की परीक्षा एग्जामिनेशन सेंटर में दो घंटे की हुई लेकिन मौसम और कुव्यवस्था ने घर से निकलने से लेकर घर लौटने तक करीब 24 घंटे इम्तिहान का सामना करना पड़ा। शनिवार से लेकर रविवार तक शाम तक अभ्यर्थियों को ठंड, ट्रेन की कमी, सड़क जाम तथा सुविधाओं के अभाव का सामना करना पडा। शनिवार की दोपहर से अभ्यर्थियों का नवादा आना शुरू हो गया। इसके बाद शुरू हुई अस्थाई ठिकाने की तलाश शुरू किया। शाम के 4 बजते-बजते शहर के करीब सभी होटलों के रूम बुक हो गए। ठंड ज्यादा थी । लिहाजा अभ्यर्थी शहर की सड़कों और गलियों की खाक छानकर सर छिपाने की जगह तलाशने लगे। कई लोगों को तो परिचितों के यहां जगह मिल गई लेकिन 5-7 हजार से अधिक लोग ऐसे ही रह गए।
अंत में हारकर फुटपाथों पर कब्जा शुरू हो गया। सबसे पहले नवादा रेलवे स्टेशन के सभी छत वाले प्लेटफार्म भर गए। यह एकदम से ठचा-ठच भर गया। विकल्प नहीं बचा तो लोगों ने खुले में प्लास्टिक और चादर बिछाकर रात बिताई। रविवार की रात करीब 7 डिग्री की कड़कड़ाती ठंड में नींद तो नहीं आई लेकिन अभ्यर्थी सिपाही बनने के सपने के सहारे ठंड लड़ते रहे। नवादा रेलवे स्टेशन में भयावह दृश्य थे। इसके अलावा शहर के अन्य सार्वजनिक जगहों, सड़क किनारे मकानों के छज्जे के पास सैकड़ों लोगों ने रात बिताई । लोगों ने कहा उनका जीवन का वास्तविक इम्तिहान हो गया। वजह साफ है कि नवादा में आवाजाही का साधन अब भी सीमित है। रहने का संसाधन भी सीमित है।
कैरियर बनाने में लाईफ को खतरे में डालने की मजबूरी
सिपाही भर्ती की परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों को आने-जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। 20 हजार अभ्यर्थियों के अलावा 5 हजार अभिभावक भी आए थे। इनमें से अधिकतर लोग ट्रेन से ही आए थे। गया-किउल रेलखंड पर ट्रेनों की संख्या सीमित है। शनिवार को दोपहर के बाद तीन ट्रेनों से अभ्यर्थी नवादा पहुंचे। इन ट्रेनों में इनती भीड़ थी लोगों को ट्रैक के दोनों तरफ उतरना पड़ा। रविवार को लौटते वक्त हजारों लोग रेल पटरी के दोनों तरफ जान जोखिम में डालकर ट्रेन का इंतेजार करते दिखे। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने पर बिना रूके ही अभ्यर्थी टूट पड़े। कोई गिरा तो किसी का पैर दबा। अजीब हालत थे। किसी को ट्रेन छूट गई तो सैकड़ों लोग गेट और बोगियों के ज्वयांटर पर चढ़कर सफर पूरी की।
जाम के कारण आधे घंटे हुआ विलंब
दरभंगा के राजदीप ने कहा कन्या इंटर विधालय में परीक्षा थी। बड़ी मुश्किल से दरभंगा से नवादा पहुंचा। रात्रि में स्टेशन पर गुजारी रात। लेकिन सुबह जब तैयार होकर परीक्षा देने के लिए निकले। तब आधे घंटे जाम में फंस गया। लिहाजा, आधे घंटे देर से एग्जाम सेंटर पहुंचा।
खुले में रात गुजारनी पड़ी
खगड़िया के सचिन ने कहा मेरा सेंटर सत्येन्द्र हाईस्कूल था। ट्रेन के जरिए नवादा पहुंचा। नवादा में कई जगह चक्कर लगाया। पर ठहरने की व्यवस्था नही मिली। ठंड भी ज्यादा थी। लिहाजा, स्टेशन पर खुले में रात गुजारनी पड़ी। कई साथियों को तो स्टेशन का छत भी नसीब नही हुआ। वह पेड़ के नीचे रात गुजारी।
मुश्किल से आया जाने में छूटी ट्रेन
मधेपुरा के शशिशंकर ने कहा मेरा सेंटर नवादा के प्रोजेक्ट स्कूल में था। मधेपुरा से सीधा संपर्क नहीं है। लिहाजा, शुक्रवार को ही घर से निकला। किसी तरह नवादा पहुंचा। नवादा में ठहरने का कोई व्यवस्था नही मिली। लिहाजा, किसी तरह रात गुजारकर रविवार को परीक्षा दे दिया। लेकिन जानेवाली ट्रेन छूट गई।
























































































































