नवादा टुडे डेस्क
काशीचक प्रखंड के अनैयापर गांव स्थित उत्क्रमित मघ्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य शिक्षकों की कमी से अंधेरे में लटका हुआ है। विद्यालय में राज्य सरकार की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा कारगर साबित नहीं हो पा रही है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1973 में उक्त गावँ में ग्रामीणों के सहयोग से प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की गई थी। छात्रों को पाचवीं कक्षा में सफल होने के बाद पांच से सात किलोमीटर दूर बिरनामा या चण्डीनोमा अध्ययन के लिए जाना पड़ता था।
छात्र दूरी को देखते हुए पाचवीं कक्षा तक पढ़ाई कर छोड़ देते थे। छात्र छात्राओं को परेशानी में देखते हुए वर्ष 2004 में विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था को देखते हुए सरकार ने उक्त विद्यालय को मघ्य विद्यालय में उत्क्रमित कर दिया। लेकिन अब विद्यालय में छात्रों के अनुपात शिक्षक नहीं रहने के कारण छात्रों के पढ़ाई सफर में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों के पढ़ाई के लिए उक्त विद्यालय में 12 कमरा उपलब्ध हैं। पढ़ाने के लिए सिर्फ पांच शिक्षक नियुक्त किया गया। जिसमें शिक्षक वीरेंद्र कुमार विद्यार्थी बीआरसी काशीचक में तथा दूसरा शिक्षक राजेन्द्र प्रसाद प्रखंड निर्वाचन में प्रतिनियुक्त हैं।
350 छात्र छात्राओं के पठन पाठन के लिए महज 3 शिक्षक की नियुक्ति है। ज्ञात हो कि विद्यालय में 350 छात्र नामांकित हैं। बच्चों के पेयजल सुविधा लिए दो चापाकल था जो कि महीनों से खराब पड़ा है। पेयजल के लिए छात्रों को इधर उधर भटकना पड़ता है। खासकर रसोइया को खाना बनाने में काफी परेशानी है। टिफिन के वक्त छात्र छात्राओं को पानी पीने के लिए नल पर लंबी कतार में खड़ा रह कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं विद्यालय में बेंच की भी कमी से छात्रों को अर्थिक से रूबरू होना पड़ता है।




















































































































